Rajasthan News: राजस्थान के भीलवाड़ा में नगर विकास न्यास (यूआईटी) की ओर से प्रस्तावित मास्टर प्लान-2035 पर विवाद तेज हो गया है। शहर और उसके आसपास के 12 गांवों की जमीन को लेकर किसान, प्रॉपर्टी डीलर और सामाजिक संगठन मैदान में उतर आए हैं। सबसे बड़ी शिकायत यह है कि जिन किसानों की जमीन इस योजना के तहत ली जा रही है, उन्हें न तो इसकी जानकारी है और न ही पिछले 12 साल से मुआवजा मिला है।

क्या है मामला?
मिली जानकारी के अनुसार भीलवाड़ा यूआईटी ने एक नया मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसमें आवासीय योजना, सड़कें, और सामुदायिक सुविधाएं विकसित करने की बात कही गई है। लेकिन इस प्लान में किसानों की जमीन को लेकर भारी अस्पष्टता है। नक्शे में आराजी नंबर तक नहीं दर्शाए गए, जिससे किसानों को ये तक नहीं पता कि उनकी जमीन जाएगी या नहीं, और अगर जाएगी तो कितनी?
यूआईटी ने आपत्तियां मांगने के लिए ड्राफ्ट प्लान ऑनलाइन डाला, लेकिन उसमें ज़मीन की स्थिति और मालिकों की जानकारी स्पष्ट नहीं है। इसका मतलब ये कि जिनके जीवन पर असर पड़ने वाला है, वही सबसे बड़ी जानकारी से वंचित हैं।
कौन-कौन से गांव होंगे प्रभावित?
इनमें पालड़ी, इंद्रपुरा, तेलीखेड़ा, गोविंदपुरा, देवखेड़ी, आरजिया, जाटों का खेड़ा, सालरिया, तस्वारिया, केसरपुरा, सांगानेर जैसे गांव शामिल हैं। किसानों का कहना है कि ये प्लान सीधे उनकी जमीन और आजीविका पर हमला है।
12 साल से मुआवजा लंबित!
राजकुमार टेलर, जो इस मुद्दे पर किसानों की तरफ से मोर्चा संभाल रहे हैं, कहते हैं कि 12 साल पहले ली गई जमीन का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। किसान भीलवाड़ा से जयपुर तक चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन न प्रशासन सुन रहा है, न न्याय मिल रहा है।
प्रॉपर्टी डीलर एसोसिएशन भी नाराज़
भीलवाड़ा प्रॉपर्टी डीलर एसोसिएशन ने भी यूआईटी पर जमकर निशाना साधा। उनका आरोप है कि मास्टर प्लान के नाम पर प्रशासन ने नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं और शहर के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। टेलर ने कहा, “50 साल की योजना को गैरकानूनी तरीके से छेड़ा जा रहा है, जिससे ना जनता को भरोसा है और ना निवेशकों को स्पष्टता।”
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