Rajasthan News: उदयपुर के सिटी पैलेस में बुधवार को अरविंद सिंह मेवाड़ के बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का राजतिलक किया गया, जिससे विवाद खड़ा हो गया है। परंपरा के अनुसार, उदयपुर राजपरिवार का गादी दस्तूर 23 उमरावों द्वारा संपन्न किया जाता है, जिसमें सलूंबर के उमराव महाराणा का रक्त तिलक करते हैं और अन्य उमराव नजराना पेश करते हैं। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के तिलक औए पगड़ी दस्तूर में 4-5 उमराव भी नही पहुँचे।

गादी दस्तूर पर उठे सवाल
भिंडर के उमराव और पूर्व विधायक रणजीत सिंह भींडर ने कहा कि महाराणा के गादी दस्तूर की ऐतिहासिक परंपरा 23 उमरावों द्वारा निभाई जाती है, लेकिन इस बार यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि 25 नवंबर को विश्वराज सिंह का पारंपरिक रूप से राजतिलक हो चुका है, जिसे सभी उमरावों की सहमति प्राप्त थी।
‘हमारे महाराणा सिर्फ विश्वराज सिंह’
रणजीत सिंह भींडर ने कहा कि महाराणा प्रताप से लेकर अब तक राजतिलक इसी प्रक्रिया से होते आए हैं, और उनके अनुसार, “हमारे महाराणा केवल विश्वराज सिंह हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि संपत्ति विवाद अलग मुद्दा हो सकता है, लेकिन महाराणा की गद्दी परंपरा से ही तय होगी।
इतिहास के अपमान का आरोप
उमरावों का कहना है कि लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के राजतिलक को गादी दस्तूर बताना 1500 साल की परंपरा का अपमान है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह केवल पारिवारिक संपत्ति विवाद का हिस्सा है, न कि वास्तविक राजपरंपरा। इस विवाद के चलते मेवाड़ राजपरिवार के अंदर असहमति की स्थिति बनी हुई है।
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