केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने सीमावर्ती राज्यों और देश के हवाई अड्डों पर बढ़ते ड्रोन खतरों से निपटने के लिए कमर कस ली है। चंडीगढ़ में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में आधुनिक सुरक्षा उपकरणों और क्विक रिएक्शन टीम को और मजबूत करने का फैसला लिया गया है।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात जैसे सीमावर्ती राज्यों में बढ़ते ड्रोन खतरों और संवेदनशील सुरक्षा चुनौतियों के बीच केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। चंडीगढ़ में सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उत्तरी क्षेत्र और हवाई अड्डा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्थाओं, सामरिक रणनीतियों और परिचालन क्षमताओं की व्यापक समीक्षा की गई।
बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन संबंधी खतरों और एंटी-सेबोटेज (तोड़फोड़ विरोधी) उपायों पर विशेष जोर दिया गया। सीआईएसएफ महानिदेशक ने कहा कि कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों से निपटने के लिए भारतीय सेना के सहयोग से चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत जवानों को संदिग्ध मानव रहित हवाई प्रणालियों (ड्रोन) को ट्रैक करने और निष्क्रिय करने की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। जवानों के तनाव प्रबंधन के लिए ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
इसके साथ ही देश के हवाई अड्डों की सुरक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की समीक्षा की गई। बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल सत्यापन प्रणाली, फुल बॉडी स्कैनर, सीसीटीवी वीडियो एनालिटिक्स, ऑटोमेटिक ट्रे रिटर्न सिस्टम, केंद्रीकृत एक्सेस कंट्रोल, पैरामीटर इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल सिस्टम को सुरक्षा तंत्र का हिस्सा बनाया जा रहा है।
सीआईएसएफ ने एयरपोर्ट्स पर तैनात क्विक रिएक्शन टीम (QRT) को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया। अब तक 49 विमानन सुरक्षा समूहों के 659 कमांडो बैटल इनोकुलेशन ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं और वर्ष 2026 के अंत तक सभी 72 हवाई अड्डों पर इसे लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, विमानन सुरक्षा अनुसंधान के लिए सीआईएसएफ विमानन सुरक्षा अकादमी स्थापित करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

