जयपुर. मणिपुर में शहीद हुए झुंझुनूं के जवान विनोद सिंह शेखावत का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव काजड़ा में किया गया. मंगलवार दोपहर करीब 1:30 बजे उनके बेटे राज्यवर्धन सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी. इस दौरान उनकी बेटी ने रोते हुए कहा, “मुझे अपने पापा पर गर्व है. मैं उन्हें हंसते-हंसते विदा करना चाहती हूं.”

शहीद की पार्थिव देह मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे उनके गांव पहुंची. उनकी पत्नी सुमन कंवर, बड़ी बेटी नैंसी, छोटी बेटी खुशी और परिवार के अन्य सदस्य गम में डूबे हुए थे. शहीद के घर पहुंचे जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल सुरेश कुमार जांगिड़ से लिपटकर नैंसी और खुशी बिलख पड़ीं. खुशी बार-बार यही कह रही थी, “मुझे पापा चाहिए, मुझे पापा चाहिए.”
अंतिम दर्शन के दौरान वीरांगना सुमन कंवर ने शहीद के पार्थिव शरीर को कसकर पकड़ा, जिन्हें बड़ी मुश्किल से संभाला गया.
मणिपुर में शेखावत की तैनाती और शहादत
विनोद सिंह शेखावत, उम्र 40 वर्ष, 2004 में सेना की 2 महार रेजिमेंट में शामिल हुए थे. वह मणिपुर में म्यांमार बॉर्डर पर तैनात थे. 23 नवंबर की रात जब वह सर्विलांस ड्यूटी पर थे, अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. उन्हें इंफाल के शिजा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ले जाया गया, जहां रात 2:30 बजे उनका निधन हो गया.
25 नवंबर को उनका पार्थिव शरीर जयपुर एयरपोर्ट पहुंचा, जहां उन्हें सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. 26 नवंबर की सुबह उनका शव गांव काजड़ा लाया गया, जहां सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हुआ.
जनता की श्रद्धांजलि
शहीद की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए. गांव में तिरंगा यात्रा निकाली गई और जेसीबी से फूलों की बारिश की गई. शहीद विनोद अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं. उनके बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा.
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