Rajasthan News: विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सरकार के मंत्री विधायकों के सवालों में घिरते नजर आए। जनजाति आश्रम छात्रावास में खाद्य सामग्री की आपूर्ति मामले में जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी, चौमू नगर परिषद में कार्य संविदा कर्मियों के मामले में स्वायत शासन मंत्री झाबर सिंह खरां, प्रदेश के विश्वविद्यालयों में निर्धारित स्वयंपाठी विद्यार्थियों के विमर्श शुल्क मामले में उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा सवालों के जवाब नहीं दे पाए। इस पर विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया और विधानसभा अध्यक्ष को कार्रवाई की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने अलग अलग सवाल पर मंत्रियों को व्यवस्था दी। खाद्य सामग्री घोटाले मामले में विधानसभा अध्यक्ष ने जांच के आदेश दिए।

देवनानी ने व्यवस्था देकर शांत कराया
सदन में हंगामा बढ़ते देख देवनानी ने स्पष्ट कहा कि प्रश्नकाल में बहस नहीं होती और सदस्यों को नियमों का पालन करना चाहिए। चौमू बगर परिषद में कार्यरत संविदा कर्मियों की स्थिति पर विधायक शिखा मील ने सवाल पर मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है। यह स्वतंत्रता के बाद से चली आ रही समस्या है। जिन मामलों में शिकायतें मिली है, उनमें संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई है। विपक्ष की मंत्री के जवाब पर पर नोंकझोंक भी हुई।
आपूर्ति दरों पर स्पष्ट जवाब नहीं दे सके मंत्री
जनजाति आश्रम छात्रावासों में खाद्य सामग्री आपूर्ति में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए विधायक अर्जुन सिंह बामनियां ने मंत्री बाबूलाल खराड़ी से आपूर्ति की दरें पूष्ठीं। विपक्ष ने स्पष्ट उत्तर नहीं मिलने पर हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि निविदा प्रक्रिया से बचने के लिए छात्रावास वार्डनों को अलग अलग बजट भेजा गया। हंगामा बढ़ते देख देवनानी ने मंत्री को पूरे मामले की गहन जांच कराने के निर्देश दिए। विधायक मनीष यादव के प्रदेश के विश्वविद्यालयों में स्वयंपाठी विद्यार्थियों से वसूले जा रहे विमर्श शुल्क को लेकर लगे सवाल के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा के जवाब पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया।
विधायक मनीष यादव ने कहा कि अलवर, जयपुर और उदयपुर के विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों से विमर्श शुल्क के रूप में लगभग 223 करोड़ रुपए वसूले गए हैं। यह राशि कहां खर्च की गई और कितने विमर्श केन्द्र स्थापित किए गए। जवाब के दौरान मंत्री बैरवा उलझते नजर आए। बेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि यदि मंत्री ने गलत उत्तर दिया है तो यह विशेषाधिकार हनन की श्रेणी में आता है। इस दौरान सदन में लगातार शोरगुल होता रहा।
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