Rajasthan Politics: पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है और इस सियासी दंगल में अब राजस्थान के दिग्गजों की एंट्री हो गई है। दिल्ली हाईकमान ने राजस्थान के कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दलों के कद्दावर नेताओं को केरल और पश्चिम बंगाल जैसे अहम राज्यों में चुनावी मैनेजमेंट की कमान सौंप दी है।

केरल में पायलट का पावर गेम

बता दें कि केरल चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदल दी है। तिरुवनंतपुरम स्थित कांग्रेस भवन में हुई एक हाई-प्रोफाइल बैठक में सचिन पायलट को बड़ी भूमिका दी गई है। दरअसल, पायलट को केरल का चुनाव पर्यवेक्षक बनाया गया है, जो वहां जमीन पर रहकर संगठन को मजबूत करेंगे।

जानकारी के अनुसार राजस्थान के राहुल कंसवा, (सांसद, चूरू), रफीक खान, अमीन कागजी और मनीष यादव (विधायक), दानिश अबरार (पूर्व विधायक), रेहाना रियाज चिश्ती (AICC सचिव) और सारिका सिंह (महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष) को केरल चुनाव में AICC की ओर से पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है

बंगाल में बीजेपी का मिशन राजस्थान

दूसरी ओर, बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में किला फतह करने के लिए राजस्थान के अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि बंगाल की अलग-अलग सीटों पर इलेक्शन मैनेजमेंट की जिम्मेदारी पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को दी गई है। उनके साथ ही विधायक जितेंद्र गोठवाल और अतुल भंसाली जैसे आक्रामक नेताओं को बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का काम सौंपा गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ भी जल्द ही बंगाल के तूफानी दौरे पर निकलेंगे, जहां वे प्रवासी सम्मेलनों के जरिए बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाएंगे।

इन नियुक्तियों का सीधा असर चुनावी राज्यों के साथ-साथ राजस्थान की आंतरिक राजनीति पर भी पड़ेगा। जब राज्य के बड़े नेता दूसरे राज्यों में पसीना बहाएंगे, तो इससे उनके राष्ट्रीय कद में इजाफा होगा। वहीं, राजस्थान के प्रवासियों को साधने में भी इन नेताओं की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है। अब देखना यह है कि राजस्थान के ये नेता दूसरे राज्यों में अपनी पार्टी की नैया पार लगा पाते हैं या नहीं।

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