रायपुर. रमन सरकार ने बड़ा फैसला करते हुए 22 अनुसूचित जनजाति और 5 अनुसूचित जाति की मात्रात्मक गलतियों को ठीक करने का फैसला किया है. जिसके बाद अब इन जातियों को जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा.

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में मंत्रिपरिषद की बैठक सम्पन्न हुई. जिसमें य​ह निर्णय लिया गया है. इस निर्णय के बाद प्रदेश के लाखों लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा. जो अब तक जातियों की मात्रात्मक गलतियों के चलते सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे थे.

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत 42 जाति समूह और अनुसूचित जाति के अंतर्गत 44 जाति समूहअधिसूचित किए गए हैं। यह अधिसूचना भारत सरकार के राजपत्र में हिन्दी और अंग्रेजी में प्रकाशित है। इनमें से कई जातियों के नामों में उच्चारण भेद पाएजाते हैं, जो इनके ही स्थानजनित उच्चारणगत विभेद हैं। चूंकि मूल रूप से यह अधिसूचना अंग्रेजी भाषा और लिपि में जारी हुई है तथा इसका हिन्दी अनुवादसिर्फ हिन्दी अधिसूचना के रूप में जारी हुआ है। अतः उच्चारण भेद के कारण मूल अनुसूचित जनजाति और मूल अनुसूचित जाति के लोगों को जाति प्रमाणपत्र उनके जनजाति अथवा अनुसूचित जाति का होने के बाद भी जारी नहीं हो पा रहा था।

डॉ. रमन सिंह ने बताया कि इन कठिनाईयों को देखते हुए राज्य सरकार ने भाषविदों की चार सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति को राज्य कीअनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों के अंग्रेजी लिपि के शब्दों के स्थानीय भाषा में ध्वन्यात्मक मानक शब्द अंकित करने के बारे में विचार करनेऔर अनुशंसा देने की जिम्मेदारी दी गई थी।समिति ने इस महीने की 14 तारीख को राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट दी है। इसमें समिति ने अनुसूचित जन-जातियों में से 22 जातियों और अनुसूचित जातियों में 05 जातियों के उच्चारणगत विभेद इंगित किए हैं, जिन्हें आज मंत्रि परिषद ने विचार-विमर्श के बादमान्य करने का निर्णय लिया। इनमें अनुसूचित जनजातियों के 22 समूहों के विभिन्न उच्चारण विभेद और अनुसूचित जातियों के पांच समूहों के 19 उच्चारणविभेद शामिल हैं। अनुसूचित जनजातियों से संबंधित प्रकरणों में – भुईंहार, भारिया, भूमिया, पण्डो, भूंजिया, बियार, धनवार, गड़ाबा, गदबा, गोंड, धुलिया,डोरिया, कंडरा, नागवंशी, हल्बा, तंवर, खैरवार, कोन्ध, कोड़ाकू, धनगड़, पठारी और सवरा जाति के अंतर्गत विभिन्न उच्चारण विभेद वाली जातियां शामिलहैं। इसी तरह अनुसूचित जाति से संबंधित प्रकरणों में औधेलिया, धारकर, चडार, गांड़ा और महार जाति समूहों में विभिन्न उच्चारण विभेद वाली जातियांशामिल है।

समिति के प्रतिवेदन पर विचार करने के बाद मंत्रिपरिषद् ने निर्णय लिया है कि संलग्न तालिका के कॉलम दो में अंग्रेजी में उल्लेखित जातियों के नामोंका हिन्दी में कॉलम चार में उल्लिखित उच्चारणगत विभेद (Phonetic Values) मान्य किया जाय और सामान्य प्रशासन विभाग तद्ाशय का निर्देशनियमानुसार जाति प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु प्रसारित करे।

गौरतलब है कि लंबे अरसे से अनुसूचित जाति और जनजाति की बड़ी आबादी को आरक्षण समेत दूसरी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इसकी वजह है कि उनकी जातियों का नाम की स्पैलिंग अलग है. जो सरकारी दस्तावेज़ में दर्ज नाम से मेल नहीं खाते. इसे लेकर पिछले दिनों महासमुंद जिले में सावरा समाज के लोगों ने बड़ा प्रदर्शन किया था.

इन जातियों को मिला फायदा