Automobile Desk : भारत और चीन के बीच राजनयिक स्तर पर जमी बर्फ के पिघलते ही अब इसका सीधा सकारात्मक असर दोनों देशों के व्यापार और घरेलू ऑटोमोबाइल सेक्टर पर दिखने लगा है। सीमा विवाद के बाद से जिन चीनी निवेश वाली ऑटो कंपोनेंट और व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के इंसेंटिव्स रुके हुए थे, केंद्र सरकार अब उनके प्रॉडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) दावों को मंजूरी देने की योजना बना रही है। सरकार के इस कदम से भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में काम कर रही कई दिग्गज कंपनियों को आर्थिक रूप से बड़ा फायदा पहुंचने की उम्मीद है।

टाटा ग्रुप के जेवी और जेएसडब्ल्यू-एमजी को मिलेगी बड़ी राहत
इस नए फैसले से सबसे ज्यादा फायदा टाटा ग्रुप की ऑटो कंपोनेंट इकाई ‘टाटा ऑटोकॉम्प सिस्टम्स’ (TACO) से जुड़े जॉइंट वेंचर्स को होने वाला है। प्रेस्टोलाइट इलेक्ट्रिक बीजिंग के साथ मिलकर बनी ‘टैको प्रेस्टोलाइट’, जो ईवी मोटर्स और कंट्रोलर्स का निर्माण करती है, तथा एयर इंटरनेशनल शंघाई के साथ मिलकर ऑटो एयर-कंडीशनिंग सिस्टम बनाने वाली ‘टैको एयर इंटरनेशनल’ के पेंडिंग आवेदनों का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
इसके अलावा, जेएसडब्ल्यू ग्रुप के साथ मिलकर भारतीय बाजार में तेजी से पैर पसार रही ‘JSW MG Motor India’ के लिए भी यह खबर संजीवनी से कम नहीं है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की मंजूरी मिलने के बावजूद चीनी शेयरहोल्डिंग के चलते इंसेंटिव की प्रक्रिया में जो रुकावट आ रही थी, वह अब दूर होने जा रही है।
नए आवेदन नहीं, केवल पुराने और मंजूर FDI वाले मामलों पर विचार
मामले से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि सरकार ऑटो PLI स्कीम के तहत नए आवेदनों के लिए कोई नई विंडो नहीं खोल रही है। यह राहत केवल उन्हीं पुरानी कंपनियों को दी जा रही है जिनके पास पहले से ही एफडीआई (FDI) की आधिकारिक मंजूरी मौजूद है।
वर्ष 2020 में गलवान घाटी घटना के बाद भारत ने सीमावर्ती देशों से आने वाले विदेशी निवेश के लिए ‘प्रेस नोट 3’ के तहत सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी थी। इसके चलते कई प्रोजेक्ट्स में चीनी निवेश की जांच के कारण पीएलआई की फाइलें ठंडे बस्ते में चली गई थीं। हाल ही में डिक्सन टेक्नोलॉजीज के एक जॉइंट वेंचर को इंसेंटिव की अनुमति देकर सरकार ने इस बात के संकेत दे दिए थे कि पारदर्शी और स्वीकृत एफडीआई वाले मामलों को आगे रोका नहीं जाएगा।
45 हजार करोड़ का निवेश और बजट में तीन गुना बढ़ोतरी
सितंबर 2021 में करीब 25,938 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ शुरू की गई ऑटो PLI योजना ने भारतीय बाजार में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। इस स्कीम के जरिए ऑटो इंडस्ट्री में अब तक 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का नया निवेश आ चुका है। इंसेंटिव के रूप में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान सरकार द्वारा लगभग 4,000 करोड़ रुपये का भुगतान उन चुनिंदा कंपनियों को किए जाने की संभावना है जो निर्धारित बिक्री और लोकल कंटेंट के मानकों को पूरा करेंगी।
आगामी समय में ईवी टेक्नोलॉजी और एडवांस ऑटो कंपोनेंट्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के आवंटन को बढ़ाकर 5,939.87 करोड़ रुपये कर दिया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 2,091.26 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग तीन गुना अधिक है। सीधी उड़ानों और व्यापारिक चर्चाओं के फिर से बहाल होने से आने वाले समय में भारतीय ऑटोमोटिव सप्लाई चेन को और अधिक मजबूती मिलने की पूरी उम्मीद है।


