उत्तम कुमार, मुजफ्फरपुर। प्रसिद्ध मुस्लिम स्कॉलर, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आरक्षण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षा के चेयरमैन हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने देशभर में मस्जिदों, मंदिरों, गुरुद्वारों, चर्चों तथा अन्य धार्मिक स्थलों से जुड़े प्रशासनिक मामलों में समानता, पारदर्शिता और विधिसम्मत प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल कानूनी प्रोटोकॉल तैयार किए जाने की मांग की है। इस संबंध में हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर “National Legal & Protection Protocol for Religious Places” तैयार किए जाने का अनुरोध किया है।

‘सभी के लिए एक समान हो कानून’

हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने कहा कि, “मस्जिद हो, मंदिर हो, गुरुद्वारा हो या चर्च-कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और कानून लागू करने की प्रक्रिया भी समान एवं पारदर्शी होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि यदि किसी धार्मिक स्थल से संबंधित कोई प्रशासनिक कार्रवाई कानून के अनुसार आवश्यक हो, तो लागू कानून के तहत आवश्यक नोटिस, आपत्ति या अपनी बात रखने का अवसर, कारणयुक्त आदेश तथा उपलब्ध कानूनी उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए।

हाजी परवेज़ सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी अवैध निर्माण को संरक्षण देने की नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि यदि कार्रवाई आवश्यक हो तो वह कानून के अनुसार, पारदर्शी और उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए की जाए।

प्रक्रियाओं को स्पष्ट करने की मांग

हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने अपने पत्र में Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 तथा संविधान में समानता और धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि राज्यों और जिला प्रशासन के लिए लागू कानूनों तथा प्रासंगिक न्यायिक निर्णयों को ध्यान में रखते हुए *स्पष्ट एवं समन्वित प्रशासनिक दिशा-निर्देश तैयार किए जाने पर विचार किया जाए।

उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण, हाईवे, रेलवे, मेट्रो, सार्वजनिक आधारभूत संरचना, पुनर्विकास अथवा अन्य विकास परियोजनाओं के दौरान यदि किसी धार्मिक स्थल से संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक हो, तो भूमि एवं सरकारी रिकॉर्ड का सत्यापन, लागू कानून के अनुसार नोटिस एवं प्रतिनिधित्व का अवसर, वैकल्पिक उपायों की समीक्षा तथा कारणयुक्त आदेश जैसी प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

सुरक्षा, डिजिटल रिकॉर्ड और प्रशासनिक पारदर्शिता पर जोर

प्रस्तावित National Legal & Protection Protocol for Religious Places में धार्मिक स्थलों के लिए न्यूनतम सुरक्षा मानक, प्रशासनिक कार्रवाई की स्पष्ट प्रक्रिया, सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता, विकास परियोजनाओं के दौरान वैकल्पिक उपायों की समीक्षा, अधिकारियों की जवाबदेही तथा उपलब्ध कानूनी उपायों की स्पष्ट जानकारी शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

हाजी परवेज़ सिद्दीकी ने धार्मिक स्थलों से संबंधित उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड को चरणबद्ध रूप से डिजिटल एवं व्यवस्थित करने तथा जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के लिए संविधान, लागू कानूनों, न्यायिक निर्णयों और संवेदनशील प्रशासनिक प्रक्रिया से संबंधित विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

‘विकास और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन जरूरी’

हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने कहा, “भारत को विकास भी चाहिए, कानून-व्यवस्था भी चाहिए और धार्मिक सौहार्द भी। इन तीनों के बीच संतुलन तभी मजबूत होगा, जब नियम स्पष्ट होंगे और प्रक्रिया पारदर्शी होगी।”

उन्होंने कहा कि उनका यह पत्र *किसी एक धर्म के लिए विशेष व्यवस्था की मांग नहीं, बल्कि देशभर में मस्जिद, मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च और अन्य धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में लागू कानून के अनुरूप समान, पारदर्शी और विधिसम्मत प्रक्रियात्मक व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।

हाजी परवेज़ सिद्दीकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया कि संबंधित मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों के साथ आवश्यक विचार-विमर्श कर National Model Legal & Protection Protocol अथवा आवश्यक मॉडल दिशा-निर्देश तैयार करने की दिशा में पहल की जाए।

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