Automobile desk: भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दोपहिया वाहनों की बिक्री के मामले में देश के गांवों ने बड़े-बड़े शहरों और मेट्रो शहरों को काफी पीछे छोड़ दिया है। साल 2026 के शुरुआती छह महीनों के आंकड़े बताते हैं कि देश में बिकने वाले कुल टू-व्हीलर्स में से आधी से ज्यादा हिस्सेदारी अकेले ग्रामीण इलाकों की रही है।
जैटो डायनामिक्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में हुए कुल टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन का 55 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण भारत से आया है। इसकी तुलना में शहरी इलाकों की हिस्सेदारी 32 फीसदी और बड़े मेट्रो शहरों का योगदान महज 13 फीसदी दर्ज किया गया। यह आंकड़े साफ जाहिर करते हैं कि दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियों के लिए असली बाजार अब शहरों की चमक-धमक में नहीं, बल्कि गांव-देहात की सड़कों पर फल-फूल रहा है।
गांवों में रहने वाले खरीदारों की पहली पसंद आज भी मोटरसाइकिल बनी हुई है। जनवरी से जून 2026 की अवधि में ग्रामीण भारत में रजिस्टर्ड कुल दोपहिया वाहनों में 68.3 फीसदी हिस्सेदारी अकेले मोटरसाइकिलों की रही। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मांग 100cc से 125cc क्षमता वाले कम्यूटर मॉडल्स की है। ग्रामीण मोटरसाइकिल बाजार के करीब 75 प्रतिशत हिस्से पर इसी कैटेगरी का कब्जा है। इसकी सबसे बड़ी वजह इन बाइक्स का शानदार माइलेज, किफायती दाम और उबड़-खाबड़ रास्तों पर भी टिकाऊ प्रदर्शन है।

हालांकि, गांवों का ध्यान अब केवल मोटरसाइकिलों तक सीमित नहीं है, वहां स्कूटरों का क्रेज भी तेजी से बढ़ा है। कुल ग्रामीण रजिस्ट्रेशन में स्कूटरों की हिस्सेदारी लगभग 24 प्रतिशत दर्ज की गई है। दिलचस्प बात यह है कि गांव के ग्राहक 90-110cc और 125cc दोनों ही सेगमेंट के स्कूटरों को बराबर तवज्जो दे रहे हैं, जिससे यह साफ होता है कि ग्रामीण खरीदारों की पसंद अब विविधता से भर रही है।
अगर फ्यूल टाइप की बात करें, तो ग्रामीण भारत में अभी भी पेट्रोल वाहनों का ही वर्चस्व है। गांवों में बिकने वाले 94 फीसदी टू-व्हीलर्स पेट्रोल इंजन वाले हैं। इसके विपरीत, इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ यहां अभी शुरुआती चरण में है, जहां ईवी की हिस्सेदारी केवल 5.9 फीसदी है। शहरों में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बाजार हिस्सेदारी 10.7 प्रतिशत और मेट्रो शहरों में 10.9 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
गांवों के ईवी मार्केट में टीवीएस मोटर कंपनी और बजाज ऑटो ने मिलकर अपनी मजबूत पकड़ बनाई हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिकने वाले कुल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स में से 56 फीसदी हिस्सेदारी अकेले इन दो दिग्गजों के पास है।
राज्यों के स्तर पर नजर डालें, तो भौगोलिक जरूरतों के हिसाब से ग्राहकों की पसंद में अंतर साफ झलकता है। राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में 100-110cc बाइक्स का एकतरफा दबदबा देखने को मिला, जहां कुल टू-व्हीलर बिक्री में इनकी हिस्सेदारी 74 प्रतिशत तक रही। वहीं उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भी किफायती और बेहतर माइलेज देने वाली कम्यूटर मोटरसाइकिलों को ही सबसे ज्यादा तरजीह दी गई।


