कुंदन कुमार, पटना। बिहार की राजनीति में अपराध और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। हाल ही में मनेर में पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ को लेकर राजनीतिक घमासान मच गया है। सरकार के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने राजद नेता तेजस्वी यादव के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने पुलिस कार्रवाई की चपेट में आए लोगों को आम नागरिक करार दिया था।
मनेर मुठभेड़ और पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड के तार
यह पूरा विवाद मनेर में हुई उस घटना से जुड़ा है, जहां अपराधियों ने पुलिस दल पर ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए करीब 24 राउंड गोलियां चलाईं। इस खतरनाक मुठभेड़ में थाने के प्रभारी अधिकारी भी घायल हो गए। पुलिस की शुरुआती जांच और खुलासों के अनुसार, इस वारदात में शामिल आरोपी कोई साधारण नागरिक नहीं, बल्कि एक पैक्स अध्यक्ष के हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में वांछित पेशेवर शूटर थे। पुलिस ने अपनी जान जोखिम में डालकर जवाबी कार्रवाई की, जिसे प्रशासन और सत्ता पक्ष ने कानून के शासन की स्थापना की दिशा में एक जरूरी कदम बताया है।
तेजस्वी यादव के बयान पर तीखा हमला
विपक्षी नेता तेजस्वी यादव द्वारा इन अपराधियों को आम आदमी बताए जाने पर सत्तारूढ़ दल ने कड़ी आपत्ति जताई है। नेताओं का कहना है कि यह केवल एक तथ्यात्मक झूठ नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर खूंखार अपराधियों और माफियाओं की खुली हिमायत करना है।
जीरो टॉलरेंस और जंगलराज का अंत
सरकार की ओर से स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि बिहार में अब तथाकथित जंगलराज का दौर पूरी तरह समाप्त हो चुका है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य नेताओं के रुख के मुताबिक, राज्य सरकार अपराध और भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस (शून्य सहनशीलता) की नीति पर पूरी सख्ती से कायम है। पुलिस प्रशासन को यह खुली छूट दी गई है कि राज्य में कानून से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा न जाए, चाहे उसका राजनीतिक रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो। यह घटना साबित करती है कि बिहार में कानून का राज सर्वोच्च है और अराजकता फैलाने वालों के लिए कोई जगह नहीं बची है।

