पंजाब में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक, क्या फिर आंदोलन की राह पकड़ेंगे किसान ?

चंडीगढ़। दिल्ली में कामयाब किसान आंदोलन की अगुवाई करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की आज बैठक हो रही है. इसमें आंदोलन खत्म करते वक्त मांगों पर केंद्र सरकार से बनी सहमति को लेकर चर्चा होगी. सबसे बड़ी मांग फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी के लिए कमेटी बनाने की थी. इसका अभी तक गठन नहीं हुआ है. इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, यूपी, चंडीगढ़, दिल्ली समेत अलग-अलग जगहों पर दर्ज केस भी वापस नहीं हुए. साथ ही पंजाब के 22 किसान संगठनों को लेकर भी इसमें विचार-विमर्श किया जाएगा, जो अब पंजाब में विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेंगे.

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बता दें कि मिनिमम सपोर्ट प्राइस पर कानूनी गारंटी के लिए केंद्र सरकार कमेटी बनाएगी, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि लिए जाएंगे. अभी जिन फसलों पर MSP मिल रही है, वह जारी रहेगी. MSP पर जितनी खरीद होती है, उसे भी कम नहीं किया जाएगा. साथ ही हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार किसानों पर दर्ज केस वापस लेगी. दिल्ली और अन्य केंद्रशासित प्रदेशों के साथ रेलवे द्वारा दर्ज केस भी वापस होंगे. इसके अलावा जिन मांगों पर सहमति बनाकर आंदोलन खत्म हुआ था, उसमें पंजाब सरकार की तरह प्रदर्शन में यूपी और हरियाणा के मृत किसानों के परिवार को 5 लाख का मुआवजा दिया जाएगा. बता दें कि किसान आंदोलन में 700 से ज्यादा किसानों की मौत हुई थी.

 

इन मांगों पर भी बनी थी सहमति

बिजली बिल- बिजली संशोधन बिल को सरकार सीधे संसद में नहीं ले जाएगी. पहले उस पर किसानों के अलावा सभी संबंधित पक्षों से चर्चा होगी.
प्रदूषण कानून- प्रदूषण कानून को लेकर किसानों को सेक्शन 15 से आपत्ति थी, जिसमें किसानों को कैद नहीं, जुर्माने का प्रावधान है. इसे केंद्र सरकार हटाएगी.

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फिरोजपुर में 5 जनवरी को पीएम नरेंद्र मोदी की रैली से पहले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत ने किसान नेताओं से मीटिंग की थी. इसमें सहमति बनी थी कि 15 जनवरी तक MSP कमेटी बना दी जाएगी. 30 जनवरी तक केस वापस ले लिए जाएंगे. 15 मार्च को पीएम मोदी किसान नेताओं से नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में मिलेंगे. हालांकि किसानों के हाईवे ब्लॉक करने की वजह से पीएम को संबोधित किए बिना ही दिल्ली वापस लौटना पड़ा, जिसके बाद यह सहमति भी ठप हो गई. आंदोलन का बड़ा चेहरा रहे किसान नेता बलबीर राजेवाल संयुक्त किसान मोर्चा से बाहर होंगे. इसकी वजह उनका चुनाव लड़ना है. राजेवाल पंजाब में चुनाव लड़ने वाले 22 किसान संगठनों की अगुवाई कर रहे हैं. वही किसानों का CM चेहरा भी हैं. MSP कमेटी के लिए केंद्र को भेजे नाम में भी राजेवाल शामिल थे, लेकिन अब उन्हें इसमें नहीं रखा जाएगा.

 

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