पंकज श्रीवास्तव, छपरा। संसाधन सीमित थे, लेकिन सपने की उड़ान पर कोई पहरा नहीं था। रास्ते में चुनौतियां थीं, मगर लक्ष्य से नजर हटाने का विकल्प नहीं। इसी जिद, मेहनत और अनुशासन के दम पर सारण जिले के काजीपुर गांव निवासी बॉबी कुमार ने अंतर्राष्ट्रीय खेल के मंच पर अपनी पहचान बनाई है। एशियन गेम्स की सेपक टकरा स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम के प्रमुख सदस्यों में शामिल बॉबी ने न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे सारण और बिहार का मान बढ़ाया है।
उनकी उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सुविधाओं की कमी को अपने सपनों की राह का सबसे बड़ा रोड़ा मान लेते हैं। जापान के आइची- नागोया में आयोजित प्रतिष्ठित एशियन गेम्स की सेपक टकरा स्पर्धा में भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया है। इस ऐतिहासिक सफलता में बॉबी कुमार की अहम भूमिका रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करना और पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा बनना उनके वर्षों के कठिन अभ्यास, संघर्ष और समर्पण का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने सम्मानित कर बढ़ाया हौसला

बॉबी की इस उपलब्धि के लिए पटना स्थित लोकसेवक भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्य सरकार की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने बॉबी कुमार को सम्मान देकर उनकी उपलब्धि की सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सारण की ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकल कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना राज्य के युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है। वहीं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी बिहार की नई खेल नीति से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मिल रहे अवसरों और सम्मान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बॉबी की सफलता इन प्रयासों का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
परिवार ने सीमित संसाधनों को नहीं बनने दिया बाधा

बॉबी की कहानी केवल एक पदक जीतने वाले खिलाड़ी की कहानी नहीं है। बल्कि यह उस परिवार के विश्वास और सहयोग की कहानी भी है, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटे के खेल के प्रति जुनून को कमजोर नहीं पड़ने दिया। परिवार के मार्गदर्शन और समर्थन ने बॉबी को लगातार आगे बढ़ने की ताकत दी। बॉबी के मुताबिक, इस सफलता के पीछे माता- पिता का त्याग, भाई का सहयोग और गांव के लोगों का आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि खेल के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ और परिवार ने भी उन्हें अपने लक्ष्य से पीछे हटने नहीं दिया। उनके लिए कांस्य पदक केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और भरोसे का परिणाम है।
समर्पण, अनुशासन और निरंतर अभ्यास जरूरी-बॉबी कुमार
बॉबी कुमार का मानना है कि खेल किसी भी पृष्ठभूमि के युवा को अपनी पहचान बनाने का अवसर देता है। इसके लिए समर्पण, अनुशासन और निरंतर अभ्यास जरूरी है। उन्होंने युवाओं से कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहना चाहिए। असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीखकर आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता है। बॉबी की उपलब्धि से काजीपुर गांव सहित पूरे सारण जिले में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों और खेल प्रेमियों के लिए यह गर्व का क्षण है कि उनके बीच से निकले एक युवा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीता। उनकी सफलता ने ग्रामीण प्रतिभाओं की संभावनाओं को भी सामने रखा है।
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