पटना। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे रामपुकार सिन्हा ने अपना नामांकन वापस लेने का बड़ा ऐलान कर दिया है। अब वे आगामी चुनाव में किसी भी तरह से एनडीए गठबंधन को नुकसान न पहुंचाते हुए एनडीए के आधिकारिक उम्मीदवार का समर्थन करेंगे। इस फैसले से क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों में एक नया मोड़ आ गया है, जिससे एनडीए खेमे को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

​इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक घोषणा एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के तीन प्रमुख विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और अन्य वरिष्ठ नेता इस दौरान खास तौर पर मौजूद रहे। प्रेसवार्ता में नेताओं ने बताया कि रामपुकार सिन्हा ने पहले सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, जैसे ही एनडीए गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व का निर्देश सामने आया, पार्टी और गठबंधन के व्यापक हितों को सर्वोपरि रखते हुए यह आपसी सहमति बनाई गई कि चुनाव में एनडीए को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए।

​रालोमो विधायकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य पार्टी के एक ऐसे पुराने कार्यकर्ता को पूरा मान-सम्मान दिलाना था, जो पिछले 2005 से लगातार पिछले 20 वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहा है। लेकिन गठबंधन की एकजुटता और अनुशासन सबसे पहले आता है। यही कारण है कि अब आपसी समन्वय के बाद यह तय किया गया है कि आज से रामपुकार सिन्हा पूरी ताकत के साथ एनडीए गठबंधन के अधिकृत उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे और उनके लिए समर्थन जुटाएंगे।

​इस फैसले के पीछे की पृष्ठभूमि पर चर्चा करते हुए विधायकों ने स्वीकार किया कि इस पूरे मामले को लेकर पहले पार्टी की ओर से निष्कासन का पत्र भी जारी हो चुका था। इसके बावजूद वे तीनों विधायक खुलकर रामपुकार सिन्हा के साथ खड़े रहे और उनके नामांकन के समय उनके साथ मौजूद रहे। नेताओं ने साफ किया कि रामपुकार सिन्हा पिछले 20 सालों से लगातार पार्टी के एक बेहद महत्वपूर्ण और वफादार कार्यकर्ता रहे हैं। एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के साथ टेलीफोन पर हुई सकारात्मक बातचीत के बाद यह व्यावहारिक निर्णय लिया गया।
​चूंकि आधिकारिक तौर पर नामांकन वापसी की आखिरी तारीख पहले ही 9 तारीख को समाप्त हो चुकी है, इसलिए तकनीकी रूप से उनका नाम मतपत्र पर मौजूद रह सकता है, लेकिन उनका और उनकी पूरी टीम का पूर्ण नैतिक समर्थन पूरी तरह से एनडीए उम्मीदवार के साथ ही रहेगा। इस समझौते के बाद अब सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एनडीए की स्थिति और अधिक मजबूत होती दिख रही है, और विरोधी दलों के सामने चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।