देहरादून में पढ़ाई बीच में छोड़ चुकी 444 छात्राओं को चिह्नित किया गया है, जिनमें से 101 को दोबारा स्कूल से जोड़ा जा चुका है. जिला प्रशासन अब डिजिटल पोर्टल के जरिए इन छात्राओं की निगरानी की व्यवस्था करने जा रहा है.
देहरादून. उत्तराखंड के देहरादून जिले में पढ़ाई बीच में छोड़ चुकी 444 छात्राओं को चिह्नित किया गया है. जिला प्रशासन की पहल के तहत अब तक 101 छात्राओं को दोबारा स्कूल में दाखिला दिलाया जा चुका है, जबकि अगले चरण में 111 छात्राओं को शिक्षा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.
जिला प्रशासन ने ड्रॉपआउट छात्राओं को दोबारा विद्यालय से जोड़ने के लिए नंदा सुनंदा योजना के तहत अभियान शुरू किया है. प्रशासन के अनुसार, कई छात्राओं ने पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी.
101 छात्राओं की वापसी
देहरादून जिले में ड्रॉपआउट छात्राओं का आंकड़ा सामने आने के बाद प्रशासन ने इस दिशा में अभियान तेज किया. अब तक 101 छात्राएं फिर से विद्यालय जाने लगी हैं.
अगले चरण में 111 छात्राओं को स्कूल से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. जिलाधिकारी आशीष चौहान ने इन छात्राओं के परिजनों से बातचीत की और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उन्हें दोबारा स्कूल भेजने के निर्देश दिए हैं.
बनेगा डिजिटल पोर्टल
जिला प्रशासन अब ऐसी छात्राओं की लगातार निगरानी के लिए एक डिजिटल पोर्टल तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है. इसमें छात्राओं से जुड़ा रिकॉर्ड रखा जाएगा और उनकी शैक्षणिक स्थिति की निगरानी की जाएगी.
प्रशासन ने शुरुआत में शहरी क्षेत्र में पढ़ाई छोड़ चुकी छात्राओं पर विशेष ध्यान दिया है. उद्देश्य यह है कि उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने के साथ उनकी शिक्षा जारी रखने के लिए जरूरी सहयोग भी उपलब्ध कराया जा सके.
गंभीर बीमारी वाले छात्र भी
जिलाधिकारी आशीष चौहान के अनुसार, पोर्टल के जरिए यह भी जानकारी रखी जाएगी कि कौन सा छात्र या छात्रा किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है और उसे किस तरह के इलाज की जरूरत है. इस व्यवस्था में गंभीर बीमारी से जूझ रहे छात्र और छात्राएं भी शामिल होंगे.
ड्रॉपआउट छात्राओं को स्कूल से जोड़े रखने के लिए बजट की मांग की गई थी, जिसे उपलब्ध कराया जा रहा है. प्रशासन की ओर से अगले चरण में 101 छात्राओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए 9 लाख रुपये का बजट जारी किया जा रहा है.
जिला प्रशासन का फोकस छात्राओं को दोबारा स्कूल तक पहुंचाने के साथ उनकी आगे की शैक्षणिक स्थिति पर नजर बनाए रखने पर है. इसके लिए डिजिटल निगरानी व्यवस्था को महत्वपूर्ण माध्यम के तौर पर विकसित किया जा रहा है.

