अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। बिहार के शिक्षा विभाग द्वारा राज्यभर के विद्यालयों में बुनियादी ढांचे को सुधारने और बच्चों को बेहतर माहौल देने के तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन रोहतास जिले के सासाराम से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो इन दावों की पोल खोलती नजर आती है। शिवसागर प्रखंड अंतर्गत संचालित उत्क्रमित मध्य विद्यालय गोतहर में छात्रों की बंपर उपस्थिति और अच्छी पढ़ाई के बावजूद संसाधनों का घोर अभाव है। यहां महज 6 कमरों में 723 बच्चों का भविष्य गढ़ा जा रहा है, जिससे न सिर्फ शिक्षक बल्कि छात्र और उनके अभिभावक भी खासे परेशान हैं।
एक से आठवीं तक की कक्षाएं, पर बैठने की जगह का टोटा
इस विद्यालय की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां कक्षा 1 से लेकर 8वीं तक की पढ़ाई होती है, लेकिन कुल कमरों की संख्या मात्र 6 है। इसमें भी एक कमरे का उपयोग स्कूल के कार्यालय (ऑफिस) और जरूरी सामान, कागजात व एमडीएम सामग्री रखने के लिए किया जाता है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के लिए केवल 5 कमरे ही शेष बचते हैं। इन पांच कमरों में ही 700 से अधिक बच्चों को बैठाकर पढ़ाना शिक्षकों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
खचाखच भरे कमरे, दम घुटने जैसे हालात
विद्यालय का परिसर काफी छोटा है और छात्र-संख्या बहुत अधिक है। स्थिति यह होती है कि कक्षाओं के दौरान बच्चे खचाखच भरे कमरों में बैठने को मजबूर होते हैं। छोटे कमरों और अत्यधिक भीड़ के कारण बच्चों को पढ़ाई के दौरान भारी घुटन और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्मी या उमस के दिनों में तो स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जिससे बच्चों का ध्यान पढ़ाई से भटक जाता है।
अच्छी है उपस्थिति और पढ़ाई
सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि इस स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बहुत ही शानदार है। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय के शिक्षक पूरी मेहनत से पढ़ाते हैं और यहां शिक्षा का स्तर भी काफी अच्छा है। यही वजह है कि अभिभावक अपने बच्चों को लगातार इस स्कूल में भेज रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक और विभागीय उदासीनता के कारण विद्यालय भवन का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
सिर्फ आश्वासन मिला, धरातल पर कुछ नहीं
विद्यालय के प्रधानाध्यापक आशुतोष कुमार ने बताया कि उन्होंने कमरों की कमी और बच्चों की परेशानी को लेकर कई बार उच्चाधिकारियों को लिखित पत्र भेजा है। इसके अलावा वे खुद कई बार विभागीय अधिकारियों से मिलकर स्थिति से अवगत करा चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले हैं। धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
अभिभावकों और शिक्षाविदों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द इस विद्यालय के लिए अतिरिक्त कमरों का निर्माण कराया जाए ताकि इन 723 नौनिहालों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल मिल सके।


