दिलशाद अहमद, सूरजपुर। सूरजपुर जिले के एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र की बंद पड़ी खदानों में चोरी और पेड़ों की कटाई की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इस दौरान चोर खदानों में तैनात सुरक्षाकर्मियों पर जानलेवा हमला करने से भी नहीं चूक रहे हैं। बीती रात एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के गांगीकोट में 25 से 30 लोगों द्वारा यूके लिप्टस के पेड़ों की कटाई की जा रही थी। खदान के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद चोरों ने दोनों सुरक्षाकर्मियों पर जानलेवा हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इतना ही नहीं, चोरों ने सुरक्षाकर्मियों की मोटरसाइकिल को भी आग के हवाले कर दिया। घायल जवानों का इलाज एसईसीएल के बिश्रामपुर अस्पताल में जारी है। फिलहाल दोनों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

बंद पड़ी खदानों में लगातार हो रही चोरी

दरअसल, एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र की बंद पड़ी 5-6 खदानों पर चोरों की नजरें जमी रहती हैं और चोरों के द्वारा बड़ी संख्या में गैंग बनाकर इन खदानों से लोहा, तांबा सहित अन्य सामानों की चोरी की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। इस दौरान चोरों के द्वारा सुरक्षाकर्मियों को बंधक बनाकर मारपीट कर चोरी की वारदातों को अंजाम दिया जाता है। वहीं खदान की वन संपदा को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है और खदान क्षेत्रों में लगातार पेड़ों की कटाई भी की जाती है।

अपराध दर्ज, आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

बीती रात की घटना भी चोरी और पेड़ कटाई करने से रोकने के दौरान हुई, जहां चोरों ने सुरक्षाकर्मियों पर प्राणघातक हमला कर दिया। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद भी एसईसीएल प्रबंधन कुंभकर्णी नींद में सोया बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। फिलहाल पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज कर फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। वहीं गश्त बढ़ाने और पुलिसकर्मियों की तैनाती की बात कही है।

लगातार हो रही घटनाओं को लेकर स्थानीय लोगों ने भी एसईसीएल प्रबंधन और पुलिस को आड़े हाथों लिया है और गंभीर आरोप लगाते हुए चोरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब है कि इससे पूर्व भी खदान में घुसकर बंधक बनाकर चोरी व लूटपाट करने का वीडियो सामने आ चुका है। बावजूद इसके कड़ी कार्रवाई नहीं होने से चोरों के हौसले बुलंद हैं।

बहरहाल, एक ओर लगातार बंद पड़ी खदानों में चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं, तो वहीं उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में एसईसीएल प्रबंधन की लापरवाही और पुलिस का दावा कितना कारगर साबित होता है और घायल हो रहे जवान कब तक सुरक्षित महसूस करते हैं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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