अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली. प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच हुए विवाद को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े वरिष्ठ विचारक और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि माघ मेला पूरे देश में शांति और आस्था का प्रतीक है, ऐसे में यदि कोई थोड़ी-बहुत शरारत करने की कोशिश करता भी है तो उसे कोई फल नहीं मिलता. इंद्रेश कुमार ने कहा कि जहां देवताओं और मानवता का वास होता है, वहां शैतान और राक्षसी ताकतें ज्यादा देर तक टिक नहीं पातीं. कुछ लोग स्वभाव से ही सरकार और सरकारी व्यवस्थाओं के खिलाफ खड़े रहते हैं. उन्होंने आगे कहा कि वे प्रभु से यही प्रार्थना करते हैं कि कोई भी व्यक्ति, कहीं भी हो, शांति और सद्भाव के साथ रहे.
अखंड और खंडित भारत के मुद्दे पर बोलते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि वर्ष 1947 में भारत का विभाजन हुआ और समय-समय पर देश के और भी टुकड़े हुए. दुनिया यह नहीं कहती कि 1947 में भारत को पूर्ण आजादी मिली, बल्कि यह कहा जाता है कि भारत खंडित हुआ. यह भारत की खंडित आजादी थी. उन्होंने बताया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1943 में अंडमान-निकोबार में अखंड भारत की आजादी की घोषणा की थी और उसे बनाए रखने का प्रयास भी किया था.
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इंद्रेश कुमार ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हो रहे आंतरिक और अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पंजाबी क्षेत्र में मुहाजिर हिंदू, मुहाजिर मुसलमान, सिंधी, बलोच, पख्तून और कश्मीरी मुसलमानों पर गंभीर अत्याचार होते रहे हैं. इसी तरह बांग्लादेश के चटगांव सहित अन्य इलाकों में भी मुसलमानों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है. उन्होंने कहा विभाजन के बाद बने पाकिस्तान और बांग्लादेश के भीतर के मुसलमान भी असंतुष्ट है. वहां गहन और भयानक अत्याचार हो रहे हैं. इन क्षेत्रों को हर तरह के अत्याचार से मुक्त होना चाहिए.
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