US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही दर्ज किए गए एक बड़े कानूनी मामले में बड़ा झटका लगा है. बीबीसी के खिलाफ 10 अरब डॉलर के मानहानि मुकदमे में मियामी की अदालत में जैक स्मिथ से पूछताछ और ट्रंप की पेशी को लेकर बहस हुई. BBC ने आरोप लगाया कि ट्रंप ने पहले तय 16 अक्टूबर की तारीख पर बयान देने से इनकार किया था. अमेरिकी संघीय अदालत ने ट्रंप को 11 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से बयान दर्ज कराने का आदेश दिया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीबीसी के खिलाफ दायर 10 अरब डॉलर के मानहानि मुकदमे में गुरुवार को एक नया कानूनी विवाद सामने आया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को BBC के खिलाफ 10 अरब डॉलर के मानहानि मुकदमे में 11 दिसंबर तक बयान देना होगा. अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज एनजोलिके लेट का यह आदेश BBC के वकीलों की शिकायत के बाद आया. BBC के वकील चार्ल्स टोबिन ने कहा कि डिस्कवरी की अवधि खत्म होने में दो महीने बाकी हैं, लेकिन अब तक ट्रंप का बयान नहीं लिया जा सका है.

अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज एंजेलिक लेट ने यह स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि ट्रंप तय समयसीमा के भीतर बयान दर्ज कराने में विफल रहते हैं, तो उन्हें गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें उनके मुकदमे का पूरी तरह से खारिज होना भी शामिल है.

अदालत का यह फैसला BBC के वकीलों द्वारा दर्ज कराई गई उस शिकायत के बाद आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ट्रंप लगातार अपनी गवाही में देरी कर रहे हैं. 

मियामी की अदालत में ट्रंप और बीबीसी के वकीलों के बीच इस बात पर बहस हुई कि क्या इस मामले में अमेरिका के पूर्व विशेष अभियोजक जैक स्मिथ से पूछताछ की जानी चाहिए. ट्रंप इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं.

यह पूरा मामला ट्रंप द्वारा पिछले साल दिसंबर में BBC के खिलाफ दर्ज कराए गए मानहानि के मुकदमे से जुड़ा है. ट्रंप ने ब्रिटेन के इस सार्वजनिक ब्रॉडकास्टर पर मानहानि के साथ-साथ भ्रामक और अनुचित व्यापार प्रथाओं का आरोप लगाया था. प्रसारक का आरोप है कि ट्रंप अपनी पेशी जनवरी 2027 तक टालने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, न्यायाधीश ने चेतावनी दी है कि यदि ट्रंप अदालत के तय कार्यक्रम का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

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