सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में श्रमिकों के आंदोलन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 66 श्रमिकों के समर्थन में लोगों ने सरई थाने का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने थाना प्रभारी को हटाने और आंदोलन के दौरान कथित मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना है कि श्रमिक अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस की कार्रवाई से मामला और बढ़ गया।

परफेक्ट सिक्योरिटी के श्रमिकों ने कलेक्ट्रेट पहुंच कलेक्टर से भी इस पूरे मामले की शिकायत की थी और मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की। इस पर कोई भी ठोस निर्णय नहीं होने के विरोध में श्रमिकों व उनके परिजनों व स्थानीय लोगों ने सरई थाने के सामने देर शाम से ही धरना शुरू कर दिया और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई किए जाने और थाना प्रभारी को हटाए जाने की मांग कर रहे है। वहीं कलेक्टर ने भी पीड़ित श्रमिकों से स्पष्ट कह दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराऊंगा और अगर आपकी गलती उसमें पाई जाती है तो आपके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या है मामला?

दरअसल, खनुआ तिराहा पेट्रोल पंप के पास 66 श्रमिक सिक्योरिटी एजेंसी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। श्रमिकों की मांग थी कि उन्हें नियमित ड्यूटी मिले और मजदूरी भुगतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाए। इसी दौरान पुलिस पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगा। अब प्रदर्शनकारी सिक्योरिटी एजेंसी की भूमिका की जांच और उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। थाने का घेराव करने पहुंचे लोगों ने भाजपा के मंडल अध्यक्ष केडी वैश्य और रामधनी यादव की भूमिका पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि दोनों के कहने पर पुलिस ने आंदोलनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया। उन्होंने दोनों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस को बल प्रयोग की जरूरत क्यों पड़ी? सिक्योरिटी एजेंसी की जिम्मेदारी तय कौन करेगा? प्रदर्शनकारियों ने थाना प्रभारी को हटाने, संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई और दोनों मंडल अध्यक्षों की भूमिका की जांच की मांग की है। अब जिला पुलिस प्रशासन के सामने चुनौती है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करे, ताकि श्रमिकों को न्याय मिल सके और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनी रहे।

पुलिस अधीक्षक सियाज के एम और कलेक्टर के आश्वासन के बाद धरना प्रदर्शन समाप्त किया गया और 10 दिनों के अंदर एडिशनल एसपी जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। यह पूरी जानकारी एसडीओपी गायत्री तिवारी ने धरना स्थल पर जाकर कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों और पीड़ितों को दिया, तब जाकर कांग्रेस का धरना समाप्त हुआ।

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