भोपाल। गोभिर्विप्रैश्च वेदैश्च सतीभिः सत्यवादिभिः।
इष्टैर्दानैश्च यज्ञैश्च धर्मोऽयं धार्यते सदा॥

इस प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक का आश्य है “गौ (गायों), ब्राह्मणों (ज्ञानियों), वेदों, सती (पतिव्रता/पवित्र स्त्रियों), सत्यवादियों (सदा सत्य बोलने वालों), दान और यज्ञों द्वारा यह धर्म हमेशा धारण (सुरक्षित) किया जाता है।”

मध्यप्रदेश की धरती पर खेती और पशुपालन आरम्भ से ही ग्रामीण जीवन की आधारशिला रही है। प्रदेश की पुरानी परंपरा अब आधुनिक तकनीक, सहकारिता और सरकारी योजनाओं के साथ मध्यप्रदेश की आर्थिक समृद्धि का नया आधार बन रही है। मध्यप्रदेश में आयोजित विशाल राज्यस्तरीय गौपालक सम्मेलन ने इस बदलाव की तस्वीर को और स्पष्ट किया है। सम्मेलन में केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह ने पशुधन और दुग्ध उत्पादन को किसानों और गौपालकों की आर्थिक समृद्धि का प्रमुख आधार बताया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राज्य को नई दुग्ध क्रांति की दिशा में आगे ले जाने का स्पष्ट संकल्प सामने रखा।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव स्वयं भी गौपालन की परंपरा और ग्रामीण जीवन से जुड़े हुए हैं। इसीलिए गौपालकों की समस्याओं उनकी मेहनत और उनकी आर्थिक आवश्यकताओं को लेकर उनका दृष्टिकोण प्रशासनिक कम और संवेदनशील अधिक दिखाई देता है। केंद्रीय मंत्री ने भी उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश के दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने की बात कही है।

मध्यप्रदेश में 80 लाख से भी ज़्यादा गौपालकों का वृहद् परिवार है। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने किसान कल्याण वर्ष 2026 के दौरान किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ गौपालन, दूध उत्पादन, पशुपालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन और मत्स्य पालन को भी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया है। उनका लक्ष्य साफ़ है कि किसानों के पास आय के एक  से अधिक स्रोत विकसित हों और ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से मजबूत बनें। इसी सोच के चलते मध्यप्रदेश आज दूध उत्पादन में देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रदेश में दुग्ध सहकारी समितियों को मजबूत करने और दूध संग्रहण को बढ़ाकर प्रतिदिन 50 लाख लीटर तक पहुंचाने का विशाल लक्ष्य रखा है। मध्यप्रदेश के जिन गांवों में अभी दुग्ध समितियां उपलब्ध नहीं हैं वहां भी समितियां गठित करने की दिशा में द्रुतगति से काम किया जा रहा है। यह दूध उत्पादन बढ़ाने की योजना होने के साथ ही गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का व्यापक प्रयास भी है।

प्रदेश की मोहन सरकार ने गौपालकों के हित में कई ठोस निर्णय भी लिए हैं आने वाले समय में उसका अच्छा प्रतिसाद मिलेगा ऐसी उम्मीद है।गोपालन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के सभी 313 ब्लॉकों के वृंदावन ग्रामों में उत्कृष्ट गौपालकों की प्रतियोगिता कराने की घोषणा की गई है। इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार एक लाख रुपए, द्वितीय 50 हजार रुपए और तृतीय पुरस्कार 25 हजार रुपए रखा गया है। इससे आशा की जा सकती है कि पशुपालकों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उनमे उन्नत पशुपालन के प्रति रुचि पैदा होगी।

इसी तारतम्य में मुख्यमंत्री डॉ यादव ने पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रदेश में 168 नई गौ-एम्बुलेंस चलाने की घोषणा भी की है। इसके अलावा पहले से चल रही 406 गौ-एम्बुलेंस के साथ यह विस्तार पशु चिकित्सा सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में महती भूमिका निभा सकता है। उन्नत दुधारू नस्लों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पशुपालक मेले आयोजित किए जाने की योजना भी एक अच्छा कदम है।

गौपालन को आर्थिक रूप से आकर्षक बनाने के लिए डॉ भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना भी एक अच्छी शुरुआत है। इस योजना के अंतर्गत 25 गाय पालने के लिए 40 लाख रुपए तक का ऋण और 10 लाख रुपये की सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है। नगर निगम क्षेत्र की गौशालाओं के अनुदान को भी 20 रुपये प्रति गाय से बढ़ाकर 40 रुपए प्रति गाय किया गया है। उम्मीद की जा सकती है कि राज्य सरकार के इस क़दम से गौशालाओं को संरक्षण और संचालन में अतिरिक्त सहायता मिलेगी।

मध्यप्रदेश में सहकारिता आधारित डेयरी व्यवस्था में बिचौलियों की भूमिका कम करके गौपालकों को उनके दूध का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। राज्य में 1700 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियां बनाई जा चुकी हैं इसके अलावा सांची और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच हुए समझौते के बाद दूध संग्रहण में वृद्धि भी हो रही है यह एक शुभ संकेत है। गौपालकों को मिलने वाले प्रति लीटर दूध के बेहतर मूल्य से दूध उत्पादन सीधे ग्रामीण आय से जुड़ रहा है।

सम्मेलन में उज्जैन में 255 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले तीन लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का भूमि-पूजन से इस योजना की वृहदता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। भोपाल में नए डेयरी प्लांट और राज्यस्तरीय गुणवत्ता प्रयोगशाला का लोकार्पण और शिवपुरी में मिनी डेयरी प्लांट के सुदृढ़ीकरण जैसे काम भी गोपालकों के विकास का संकेत हैं। पशुपालकों और गौशालाओं को सहायता राशि का हस्तांतरण और गौपालक दीदियों के सम्मान से इस अभियान में महिलाओं की सशक्त भूमिका का भी पता चलता है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का विज़न महज़ दुग्ध उत्पादन तक ही सीमित नहीं है। यह प्रशंसनीय बात है कि वे गौपालन को प्रकृति, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर देख रहे हैं। प्रदेश में हजारों गौशालाएं, छह करोड़ से अधिक पशुधन और लाखों गौवंश का संरक्षण सम्भावनाओं की व्यापकता बताते हैं। प्रत्येक ब्लॉक में विकसित किए जा रहे वृंदावन ग्रामों में दुग्ध उत्पादन, उन्नत नस्ल के पशुपालन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की योजना ग्रामीण जीवन को नए आयाम से जोड़ सकती है।

इस पूरे सिलसिले का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि मध्यप्रदेश सरकार ने गौपालन को परंपरा या धार्मिक भावना के अवाला ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार के रूप में सामने रखा है। दूध से दही का निर्माण और दूध से मक्खन, पनीर जैसे नगद उत्पाद के अलावा गोबर से बायोगैस, खाद, पशु आहार, नस्ल सुधार और चारा प्रबंधन जैसे कार्यों से रोजगार और आय के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। जो निस्संदेह गांव को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे अधाने वाली साबित होगी।

इस काल खंड को मध्यप्रदेश के लिए एक बड़े परिवर्तन का अवसर भी मान सकते है। डॉ मोहन यादव सरकार ने किसानों और गौपालकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का जो प्रयास शुरू किया है। उसमें केंद्र और राज्य के समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका नज़र आती है। 50 लाख लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन का लक्ष्य सिर्फ़ स्पष्ट नीति, दृढ़ इच्छा शक्ति, सहकारिता, आधुनिक तकनीक और गौपालकों की मेहनत के साथ ही सम्भव हो पाएगा। इस लक्ष्य भेदन के बाद निश्चित तौर पर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई मिल सकती है।

सच्चे अर्थों में मध्यप्रदेश को समृद्ध तभी कहा जा सकेगा जब यहाँ खेत के साथ गोशाला भी समृद्ध हो, किसानों के साथ गौपालक भी आत्मनिर्भर हो रहा हो और ग्रामीण युवाओं को अपने ही गांव में रोजगार और सम्मान के अवसर मिल रहे हों। पूरी-पूरी उम्मीद की जा रही है कि मध्यप्रदेश में सहकारिता की शक्ति, पशुपालक की मेहनत और सरकार की योजनाएं मिलकर लाखों ग्रामीण परिवारों के जीवन में समृद्धि, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखेगी।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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