असंध: बेटे के बेहतर भविष्य का सपना लेकर एक पिता ने अपनी जमीन तक बेच दी। कर्ज का बोझ भी उठाया। करीब 45 लाख रुपये खर्च करके बेटे को अमेरिका भेजा। उम्मीद थी कि बेटा परिवार की तकदीर बदल देगा। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटे को अच्छे भविष्य के लिए सात समंदर पार भेजा था, वह 15 दिन बाद ताबूत में घर लौटा। यह दर्दनाक कहानी करनाल के असंध क्षेत्र के गांव बल्ला के अनिल कुमार मान की है।

21 वर्षीय अनिल का शव शनिवार को उसके पैतृक गांव पहुंचा। बेटे का शव देखते ही परिवार का दुख फूट पड़ा। घर में जिस बेटे की वापसी का इंतजार था, वह हमेशा के लिए खामोश हो चुका था। गांव की शिवपुरी में उसका अंतिम संस्कार किया गया। पिता ऋषिपाल ने कांपते हाथों से बेटे को मुखाग्नि दी। इस दौरान माहौल गमगीन रहा।

अनिल की मौत 4 अक्टूबर को अमेरिका में हुई थी। जानकारी के अनुसार, अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उसकी जान चली गई। मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया है। जवान बेटे की मौत ने परिवार को तोड़कर रख दिया। ऊपर से विदेश में पड़े बेटे के शव को भारत लाने की चिंता भी सामने खड़ी थी।

परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी। बेटे को विदेश भेजने के लिए पिता ऋषिपाल ने जमीन बेच दी थी। कर्ज लेकर करीब 45 लाख रुपये जुटाए थे। अनिल ने दसवीं तक पढ़ाई की थी। परिवार की हालत सुधारने के लिए उसने अमेरिका जाने का फैसला किया था। उसे क्या पता था कि जिस सफर पर वह बेहतर जिंदगी की उम्मीद लेकर निकला है, उसका अंत इतना दर्दनाक होगा।

बेटे का शव भारत लाने के लिए परिवार ने सरकार से भी मदद मांगी थी। आर्थिक तंगी के कारण शव को वापस लाना आसान नहीं था। ऐसे मुश्किल वक्त में अमेरिका में रह रहे गांव के युवकों ने मदद का हाथ बढ़ाया। उन्होंने लाखों रुपये जुटाए। उनकी मदद से अनिल का शव भारत लाया जा सका।

शनिवार को अनिल पंचतत्व में विलीन हो गया। पीछे रह गया परिवार। साथ ही रह गईं उस पिता की उम्मीदें, जिसने बेटे के भविष्य के लिए अपनी जमीन और जमा-पूंजी दांव पर लगा दी थी। जिस बेटे से परिवार को सहारे की उम्मीद थी, उसी को पिता ने अपने हाथों अंतिम विदाई दी।

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