कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़: देश सेवा के लिए कारगिल युद्ध में सर्वस्व न्योछावर करने वाले हरियाणा के एक शाहिद के परिवार को देश के सर्वोच्च राजनीतिक मंच पर एक नया और बड़ा सम्मान मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को देश के 6 राज्यों में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए हरियाणा के गुरुग्राम की रहने वालीं वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। वे वर्तमान गवर्नर थावरचंद गहलोत की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगी।
शहादत के साए से राजभवन तक का सफर
डॉ. सुधा यादव का जीवन संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की एक अनूठी मिसाल है। वर्ष 1999 में जब देश कारगिल के मोर्चे पर दुश्मनों से लोहा ले रहा था, तब उनके पति सुखबीर सिंह यादव (BSF में डिप्टी कमांडेंट) ने वतन की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था। इस गहरे सदमे के बीच, उनके जीवन में एक नया मोड़ तब आया जब तत्कालीन हरियाणा भाजपा प्रभारी नरेंद्र मोदी के विशेष आग्रह पर उन्होंने राष्ट्र सेवा के लिए राजनीति के मैदान में कदम रखा।
जब पहली ही बार में ढहा दिया सियासत का बड़ा किला
राजनीति में आते ही उन्होंने इतिहास रच दिया। 1999 के लोकसभा चुनाव में डॉ. सुधा यादव ने महेंद्रगढ़ सीट से चुनावी शंखनाद किया। उन्होंने इलाके के कद्दावर और दिग्गज नेता राव इंद्रजीत सिंह को 1.39 लाख वोटों के भारी अंतर से मात देकर पहली बार संसद में कदम रखा। उनकी यह जीत देश की सियासत में बहुत बड़ी मानी गई थी।
सुषमा स्वराज के बाद यह गौरव पाने वाली दूसरी महिला
डॉ. सुधा यादव न सिर्फ एक प्रखर नेता हैं, बल्कि उच्च शिक्षित भी हैं। उन्होंने IIT रुड़की से केमिस्ट्री में पीएचडी की है। उनकी योग्यता और सांगठनिक क्षमता को देखते हुए भाजपा ने उन्हें अपने सबसे शक्तिशाली नीति-निर्धारक अंगों—’केंद्रीय संसदीय बोर्ड’ और ‘केंद्रीय चुनाव समिति’ में जगह दी। दिवंगत नेता सुषमा स्वराज के बाद इस शीर्ष बोर्ड में शामिल होने वाली वह देश की दूसरी महिला नेता हैं।
उनकी इस नई नियुक्ति से न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के सैन्य परिवारों में गौरव की लहर है।
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