कुंदन कुमार, पटना। बिहार की सियासत में इन दिनों राज्य की व्यवस्थाओं और नीतियों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। इसी क्रम में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और विधायक सुधाकर सिंह ने सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), शिक्षा बजट, और कानून-व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों को उठाते हुए तीखा हमला बोला है।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना पर उठे सवाल
सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के क्रियान्वयन पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस साल लगभग 1.37 लाख छात्रों ने इस योजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनमें से सिर्फ 14 हजार के करीब आवेदनों को ही स्वीकृति मिल पाई है। उनका यह भी आरोप है कि जिन छात्रों के आवेदन स्वीकृत हो चुके हैं, उन्हें भी समय पर ऋण राशि का भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि सभी लंबित भुगतानों का तुरंत निपटारा किया जाए और हर साल के आवेदन, स्वीकृति, लंबित मामलों और राशि वितरण (डिस्बर्समेंट) का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक इस योजना के अंतर्गत 4,04,167 छात्रों को कुल 8,149.56 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है। इसके अलावा, अगस्त 2026 में सरकार ने यह स्पष्ट किया था कि उच्च शिक्षा के लिए चार लाख रुपये तक का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड आगे भी जारी रहेगा। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर देरी की शिकायतों ने सियासी पारा गरमा दिया है।
शिक्षा बजट और मानव पूंजी पर जोर
आरजेडी नेता ने सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास अन्य विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है, लेकिन विद्यार्थियों की शिक्षा के भुगतान में अनावश्यक देरी की जा रही है। सुधाकर सिंह ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में सरकारी निवेश को बढ़ाने की सख्त जरूरत बताई। उनका मानना है कि इन क्षेत्रों में मजबूत निवेश से ही राज्य की मानव पूंजी को सशक्त किया जा सकता है।
SIR और कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुधाकर सिंह ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तक कर डाली। उन्होंने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर आपत्ति जताई और इस पूरी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। हालांकि, देश भर में ड्राफ्ट सूचियों से हटाए गए नामों (जैसे अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृतक और डुप्लीकेट मतदाता) को लेकर राजनीतिक दावों और आधिकारिक आंकड़ों का गहराई से अध्ययन करना आवश्यक है।
इसके साथ ही, उन्होंने बिहार में बढ़ते अपराध, बालू, शराब, भू-माफिया और नशीले पदार्थों के अवैध नेटवर्क को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पुलिस-प्रशासन और अपराधियों के बीच कथित सांठगांठ की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की है। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने यह भी जोर दिया कि अपराध मामलों में पीड़िताओं और उनके परिवारों की पहचान को गोपनीय रखा जाना चाहिए ताकि उनकी निजता सुरक्षित रह सके।
मुख्य मांगें
सुधाकर सिंह के इन बयानों से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की धीमी रफ्तार, SIR की प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था बिहार की राजनीति के मुख्य केंद्र बिंदु बने रहेंगे।
प्रमुख मांगें:
- लंबित स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि का अविलंब भुगतान।
- सभी शिक्षा योजनाओं और डेटा में पारदर्शिता लाना।
- मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना।
- कानून-व्यवस्था और अपराधियों के गठजोड़ की उच्च स्तरीय जांच।


