पटना/ सुपौल। ​बिहार के सरकारी स्कूलों में पारंपरिक लोक संस्कृति, अनुशासन और टीम वर्क को बढ़ावा देने के लिए संगीत शिक्षा की पहल की गई है। इसी मुहिम को सुपौल जिले के उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय (बसंतपुर, वीरपुर) में पदस्थापित संगीत शिक्षिका श्रुति मौसम धरातल पर उतार रही हैं। वह हारमोनियम की धुन पर श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों और भजनों के जरिए बच्चों को शिक्षा और संस्कार दोनों दे रही हैं।

​गीत-संगीत से बना रहीं पढ़ाई को रुचिकर

शिक्षिका श्रुति मौसम का मानना है कि खेलकूद और संगीत के माध्यम से पढ़ाने पर बच्चों की स्कूल आने में रुचि बढ़ती है। जुलाई 2026 में कक्षा में बच्चों को गाकर पढ़ाते हुए उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था, जिसे लोगों ने खूब सराहा।

​पिता से मिली संगीत की शुरुआती प्रेरणा

वीरपुर की निवासी श्रुति मौसम को संगीत की शुरुआती सीख अपने पिता और संगीत शिक्षक उमेश चंद्र झा से मिली। उनकी इस कलात्मक यात्रा को जिला प्रशासन सहरसा, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), युरेकाई संस्था और अनुमंडल प्रशासन द्वारा कई बार सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें तत्कालीन कला एवं संस्कृति मंत्री आलोक रंजन द्वारा ‘मिथिला गौरव सम्मान’ भी प्रदान किया गया है।

​शैक्षणिक योग्यता और राष्ट्रीय पहचान

पढ़ाई के क्षेत्र में भी श्रुति बेहद प्रतिभाशाली रही हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज (आईपी कॉलेज) में बीए पार्ट-टू में सर्वाधिक अंक लाने पर उन्हें ‘वीरेंद्र सिंह मेमोरियल पुरस्कार’ और दिल्ली में ‘श्री तेज सिंह मेमोरियल अवार्ड’ से नवाजा गया। वह साहित्य कला परिषद (नई दिल्ली) से सम्मानित और ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी), नई दिल्ली की ग्रेडेड आर्टिस्ट भी हैं।

​दिग्गज हस्तियों के सामने प्रस्तुत की कला

श्रुति मौसम पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, योगगुरु बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जैसी देश की प्रमुख हस्तियों के समक्ष अपनी सांगीतिक प्रस्तुति दे चुकी हैं। संगीत के जरिए बच्चों में संस्कार और ज्ञान बांटने का उनका यह अनोखा प्रयास आज मिसाल बन चुका है।