Supreme Court Hearing today on SIR: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर को लेकर पिछले एक महीने से देश में जारी बवाल के बीच सुप्रीम कोर्ट में आज SIR पर सुनवाई होगी। राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने SIR को रद्द करने की याचिका दायर की है। सप्रीम कोर्ट आज सभी की याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई कर सकती है। विपक्षी सांसदों की मांग है कि SIR प्रक्रिया पर रोक लगे, चुनाव आयोग के फैसलों की जांच हो और रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं।

इससे पहले 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर पहली सुनवाई हुई।CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया था। देश के शीर्ष न्यायालय ने याचिका को SIR से जुड़े लंबित मामलों के साथ जोड़ने का निर्देश भी दिया था।

इधर चुनाव आयोग भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 13 विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुनवाई से एक दिन पहले चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर हलफनामा दायर किया। चुनाव आयोग (election Commission) ने कहा कि हमने SIR के फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया। नियमों के अनुसार इस पर बदलाव का अधिकार केंद्र के पास है। आयोग ने कहा कि SIR पर सभी फैसले भी सर्वसम्मति से लिए गए थे। फैसलों पर CEC ज्ञानेश कुमार, कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी तीनों की सहमति थी। कोर्ट में दाखिल एफिडेविट पर भी तीनों के दस्तखत हैं।

यहां से शुरू हुआ विवाद

दरअसल SIR पर यह विवाद तब शुरू हुआ जब अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट प्रकाशित किया कि फॉर्म- 6 में हुए बदलाव की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दो अन्य़ चुनाव आयुक्तों को नहीं दी थी। अखबार के मुताबिक फॉर्म- 6 में हुए बदलाव की दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी, जिनके तहत आवेदकों को खुद को, अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को पिछली SIR से जोड़ने वाले डिटेल देने के लिए कहा गया था। हालांकि ECI ने माना कि ऑनलाइन आवेदन प्लेटफॉर्म पर जिस तरह से इसे दिखाया गया था, उससे ऐसा लग सकता था कि फॉर्म 6 में बदलाव किया गया है।आयोग ने कहा कि याचिका एक रिपोर्ट पर आधारित है, और कानून की नजर में अखबार की रिपोर्ट को सबूत नहीं माना जाता है। इसलिए CEC को काम करने से नहीं रोका जा सकता।

फॉर्म-6 में बदलाव का अधिकार सरकार के पास

आयोग का कहना है कि ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत निर्धारित फॉर्म में केवल सरकार ही बदलाव कर सकती है। आयोग ने साफ किया कि SIR के दौरान मांगा गया डिक्लेरेशन एक अलग दस्तावेज है और इसे फॉर्म 6 में किया गया संशोधन नहीं माना जा सकता।

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