राजधानी दिल्ली में सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जाम की चुनौती का स्थायी समाधान तलाशने के लिए गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में एक हाईपावर कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी दिल्ली में ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेगी और जाम से राहत दिलाने के लिए ठोस सुझाव तैयार करेगी। समिति में परिवहन, पुलिस, शहरी विकास और सड़क अवसंरचना से जुड़े कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे, ताकि समन्वित योजना बनाकर उसे जमीन पर लागू किया जा सके।
जाम को लेकर ट्रैफिक पुलिस और दिल्ली सरकार के साथ केन्द्र भी चिंतित
शहर में प्रतिदिन लाखों लोगों को सड़कों पर लंबे जाम का सामना करना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की भारी बर्बादी हो रही है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के दिल्ली सरकार के दावों के बावजूद सड़कों पर वाहनों की संख्या कम नहीं हो रही है। जाम की गंभीर स्थिति को लेकर न केवल दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और राज्य सरकार, बल्कि केंद्र सरकार भी चिंतित है। इसी को देखते हुए जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में एक हाईपावर कमेटी का गठन किया गया है।
यह कमेटी राजधानी में ट्रैफिक प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगी और जाम कम करने के लिए प्रभावी उपाय सुझाएगी। समिति में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं, ताकि समन्वित तरीके से योजना बनाकर उसे लागू किया जा सके।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, जाम कम करने के उपायों पर काम करने के लिए हाईपावर कमेटी का पुनर्गठन किया गया है। आदेश में बताया गया है कि इससे पहले सितंबर 2018 में तत्कालीन गृह सचिव की अध्यक्षता में ऐसी ही एक हाईपावर कमेटी बनाई गई थी, जिसे दिल्ली में ट्रैफिक जाम कम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब मौजूदा हालात को देखते हुए फिर से कमेटी गठित की गई है, ताकि राजधानी की यातायात व्यवस्था में सुधार लाया जा सके।
नई कमेटी की पहली बैठक 26 फरवरी को गृह मंत्रालय में आयोजित की जाएगी। बैठक में विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे और जाम की समस्या के समाधान के लिए ठोस रणनीति पर चर्चा करेंगे। केंद्र सरकार का मानना है कि दिल्ली में वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या, निर्माण कार्यों का दबाव, पार्किंग की कमी और सड़क नेटवर्क पर बढ़ते बोझ के कारण स्थिति जटिल होती जा रही है। ऐसे में समन्वित योजना बनाकर ही स्थायी समाधान संभव है।
इन विषयों पर होगा काम
कमेटी के अनुसार, जाम की समस्या से स्थायी राहत पाने के लिए सबसे पहले सड़कों की डिजाइन में सुधार करना होगा। सड़क नेटवर्क को इस तरह विकसित करने पर जोर दिया गया है कि यातायात का प्रवाह बिना रुकावट के चलता रहे और प्रमुख चौराहों पर भीड़ कम हो।
इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने की सिफारिश की गई है, ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता घटे और प्रदूषण में भी कमी आए। कमेटी ने बस, मेट्रो और अन्य साधनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन पर भी जोर दिया है, जिससे यात्रियों को एक ही यात्रा में अलग-अलग परिवहन साधनों का आसानी से उपयोग मिल सके।
पार्किंग व्यवस्था में सुधार को भी जाम कम करने का अहम उपाय बताया गया है। कमेटी ने स्मार्ट पार्किंग सिस्टम, ऑनलाइन भुगतान और बेहतर प्रबंधन लागू करने की बात कही है, ताकि सड़कों पर अवैध पार्किंग से होने वाली रुकावट खत्म हो सके।
दिल्ली सरकार भी जाम खत्म करने के लिए कर रही कई प्रयास
राजधानी में ट्रैफिक जाम की समस्या वर्षों पुरानी है, जिससे निपटने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार ने भी जाम कम करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार द्वारा मल्टीलेवल पार्किंग बनाने, संकरी सड़कों पर छोटी ‘देवी’ बसें चलाने, डीटीसी बसों की संख्या बढ़ाने और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार करने जैसे उपाय किए जा रहे हैं, ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सके। इसके साथ ही शहरभर में पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे सड़कों पर अवैध पार्किंग कम हो और यातायात सुचारु रहे। हालांकि, सड़कें चौड़ी करने, फ्लाईओवर और एक्सप्रेसवे बनाने जैसे बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बावजूद जाम की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। लगातार बढ़ती वाहन संख्या और सीमित सड़क क्षमता इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
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