रोहतक । महम में एक परिवार की खुशियां अचानक उजड़ गईं। डेढ़ साल की आस्था अब इस दुनिया में नहीं है। उसकी हंसी और किलकारियां हमेशा के लिए खामोश हो गईं। लेकिन बेटी को खोने के इस असहनीय दुख के बीच परिवार ने ऐसा फैसला लिया, जिससे दो अन्य लोगों की जिंदगी में उजाला आने की उम्मीद है। आस्था की आंखें अब दो लोगों को दुनिया देखने का मौका दे सकती हैं।

आस्था के परिवार ने दुख की घड़ी में भी नेत्रदान का संकल्प निभाया। भिवानी से पहुंची डॉक्टरों की टीम ने बच्ची के नेत्र प्राप्त किए। इसके बाद उन्हें पीजीआई के नेत्र बैंक में जमा कराया गया। परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने बेटी की याद को दूसरों की जिंदगी से जोड़ने का रास्ता चुना।

पिता की गोद में ली अंतिम सांस

महम निवासी दीपक परुथी के अनुसार, 14 अक्टूबर की शाम आस्था घर के आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे तेज बुखार हो गया। परिवार ने दवाई दी, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ।

15 अक्टूबर की सुबह करीब साढ़े 4 बजे परिजन बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां उसका तापमान 106 डिग्री बताया गया। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए पीजीआई रेफर कर दिया। लेकिन अस्पताल से निकलते समय ही पिता की गोद में आस्था की सांसें थम गईं। परिवार उसे बचाने की उम्मीद लेकर निकला था, लेकिन रास्ते में ही उसकी जिंदगी खत्म हो गई।

बेटी की याद को दूसरों की जिंदगी से जोड़ा

आस्था का जन्म 18 फरवरी 2025 को हुआ था। परिवार में उसका करीब तीन साल का एक भाई भी है। इतनी छोटी उम्र में बेटी को खोने का दुख परिवार के लिए गहरा सदमा है।

दीपक अपने भाई सोनू के साथ थोक कारोबार करते हैं। परिवार धार्मिक संस्था से भी जुड़ा है। इसी जुड़ाव के चलते परिवार ने पहले ही नेत्रदान और देहदान का संकल्प लिया था। आस्था की मौत के बाद परिवार ने उसी संकल्प को निभाने का फैसला किया।

अब परिवार की नन्ही बेटी इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी आंखों से दो लोगों को दुनिया देखने का अवसर मिल सकता है। आस्था की जिंदगी भले ही छोटी रही, लेकिन उसके परिवार का यह फैसला दूसरों के जीवन में नई उम्मीद जगाने वाला बन गया।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m