शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कवि इकबाल के नाम से मैदान होना हमारे माथे पर कलंक है। भोपाल के इकबाल मैदान को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ ट्वीट किया है।

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उन्होंने लिखा- पाकिस्तान को भारत भूमि से अलग करने का पहला प्रस्ताव (ड्राफ्ट) सहमति से लिखने वाला इकबाल के नाम पर भोपाल का ऐतिहासिक मैदान का नाम को माथे पर कलंक बताया है। भोपाल का नवाब भोपाल की गरीब जनता का – हमारे पूर्वजों का खून चूस-चूस कर इस इकबाल को उसके ऐशो आराम के लिए हजारों रुपया वजीफा में देता था।

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हम इस कलंक को मिटाकर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देंगे।

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