अनिल सक्सेना, रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर दूर सागर-भोपाल मार्ग पर स्थित ग्राम खंडेरा में मां छोले वाली का प्रसिद्ध दरबार है। यहाँ माता लगभग 450 सालों से पांच पिंडी के रूप में विराजमान हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूरी कर रही हैं।
READ MORE: Chaitra Navratri 2026: यह शक्तिपीठ कुछ अलग है, नवरात्रि में सीधी हो जाती है ‘मां कंकाली’ की झुकी गर्दन, 111 साल से जल रही अखंड ज्योति
महामारी का किया था अंत
पुरानी कथाओं के अनुसार, करीब 450 साल पहले इस क्षेत्र में एक भयंकर महामारी फैल गई थी। हालात इतने भयावह हो गए थे कि ग्रामीण एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार करके लौटते, तो दूसरे की मौत हो जाती। ऐसा सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। एक दिन जब ग्रामीण अंतिम संस्कार से लौट रहे थे, रास्ते में उन्हें एक साधु महात्मा मिले। ग्रामीणों ने अपनी समस्या बताई तो साधु ने कहा कि सूखे नारियल का यज्ञ करने से महामारी रुक जाएगी। ग्रामीणों के अनुरोध पर साधु महात्मा ने खुद सूखे नारियल से यज्ञ किया। यज्ञ के बाद माता पांच पिंडी रूप में छोले के पेड़ से प्रकट हुईं। तब से लेकर आज तक मां छोले वाली पांच पिंडी के रूप में यहां विराजमान हैं और भक्तों की हर मुराद पूरी कर रही हैं।
READ MORE: Chaitra Navratri 2026: स्वयं प्रकट हुई थी ‘नक्खी माता’ की मूर्ति, गांव में विराजमान होने के बाद कभी नहीं आया बड़ा संकट, जानें कैसे मिली ‘नक्खी माई’ के नाम से प्रसिद्धि
संतान सुख की होती है प्राप्ति
माता के दरबार में हाजिरी लगाने और मनोकामना पूरी कराने के लिए प्रदेश ही नहीं, देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। खासकर नवरात्रि के दौरान सैकड़ों भक्त नंगे पैर पैदल ही मां के दरबार में पहुंचते हैं। मान्यता है कि जिन महिलाओं को संतान सुख नहीं मिल रहा, वे यहां अर्जी लगाती हैं तो उनकी गोद जरूर भर जाती है। जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, वे मां के दरबार में चुनरी चढ़ाते हैं और आभार व्यक्त करते हैं।


