शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कवि इकबाल के नाम से मैदान होना हमारे माथे पर कलंक है। भोपाल के इकबाल मैदान को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ ट्वीट किया है।
27 मार्च महाकाल भस्म आरती: मस्तक पर वैष्णव तिलक चंद्र अर्पित कर सुगंधित फूलों से बाबा का श्रृंगार,
उन्होंने लिखा- पाकिस्तान को भारत भूमि से अलग करने का पहला प्रस्ताव (ड्राफ्ट) सहमति से लिखने वाला इकबाल के नाम पर भोपाल का ऐतिहासिक मैदान का नाम को माथे पर कलंक बताया है। भोपाल का नवाब भोपाल की गरीब जनता का – हमारे पूर्वजों का खून चूस-चूस कर इस इकबाल को उसके ऐशो आराम के लिए हजारों रुपया वजीफा में देता था।
450 साल पुराना चमत्कारी दरबार: जहां छोले के पेड़ के पास से प्रकट हुईं पांच मुख वाली माता,
हम इस कलंक को मिटाकर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देंगे।


