पेंटागन ने रविवार को ईरानी ड्रोन हमले में मारे गए 6 अमेरिकी सैनिकों में से चार की पहचान उजागर कर दी है. इन सैनिकों में कैप्टन कोडी खोर्क, सार्जेंट फर्स्ट क्लास नोआ टिटजेंस, सार्जेंट फर्स्ट क्लास निकोल अमोर और सार्जेंट डेक्लान कोडी शामिल हैं. ये सभी सैनिक आयोवा की 103वें सस्टेनमेंट कमांड का हिस्सा थे, जो युद्ध के मैदान में खाना, ईंधन और गोला-बारूद पहुंचाने का काम करती है. कुवैत के पोर्ट शुआइबा में एक कमांड सेंटर पर हुए इस ड्रोन हमले ने अमेरिकी खेमे में शोक की लहर दौड़ दी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना पर दुख जताते हुए एक कठोर टिप्पणी की और कहा कि युद्ध खत्म होने से पहले अभी और भी मौतें हो सकती हैं.

रविवार को हमले में मारे गए दो और सैनिकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है. रविवार को जब एक ड्रोन ने कुवैत के पोर्ट शुआइबा में एक कमांड सेंटर पर हमला किया, तभी यूएस के इन सैनिकों की मौत हो गई थी. 

पेंटागन ने रविवार को ईरानी ड्रोन हमले में मारे गए 6 अमेरिकी सैनिकों में से चार की पहचान कर ली और तस्वीरें जारी की हैं. इन सैनिकों में कैप्टन कोडी खोर्क (35), सार्जेंट फर्स्ट क्लास नोआ टिटजेंस (42), सार्जेंट फर्स्ट क्लास निकोल अमोर (39) और सार्जेंट डेक्लान कोडी (20) का नाम शामिल है. चारों सैनिकों को आयोवा की एक आर्मी रिज़र्व सस्टेनमेंट यूनिट, 103वें सस्टेनमेंट कमांड में भेजा गया था, जो खाना, फ्यूल, पानी और गोला-बारूद, ट्रांसपोर्ट का सामान और सप्लाई देता है.

न्यूज़ एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में, ईरान के सुप्रीम लीडर के ऑफिस के स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि वॉशिंगटन का बड़ा मकसद तेहरान से कहीं आगे तक फैला हुआ है.

उन्होंने कहा, “अमेरिका का मकसद ईरान नहीं है, लेकिन ईरान के बाद, यह दूसरे देशों पर आएगा. आने वाले वक्त में, दुनिया के सबसे ताकतवर देश भारत, चीन, रूस और अमेरिका भी होंगे. इसलिए अमेरिका कोई पार्टनर नहीं चाहता. वह नहीं चाहता कि भारत या चीन कोई ताकतवर देश बनें. इसी वजह से, वे भविष्य में इसे रोकने के लिए बहुत सारी लड़ाइयां करते हैं.”

उन्होंने कहा, “अमेरिका का आखिरी मकसद सिर्फ़ ईरान नहीं है. हमारी सरकार को टारगेट करने के बाद, वे दूसरे देशों पर ध्यान देना चाहते हैं. जांच से पता चलता है कि दुनिया की राजनीति में “पावर में बदलाव” होने वाला है.

मौजूदा स्थिति को देखते हुए मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं. एक तरफ जहां अमेरिका अपने सैनिकों की मौत का बदला लेने के लिए और आक्रामक हो सकता है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता और ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर की लड़ाई बता रहा है. आईआरजीसी के दावों के मुताबिक अब तक सैकड़ों अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और अमेरिका को अपने एयरक्राफ्ट कैरियर तक पीछे हटाने पड़े हैं. 

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