Tiger Shroff Firing Case: टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस की मुंबई पुलिस (Mumbai Police) जांच कर रही है। इसी बीच टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (Delhi Police Special Cell) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हथियारों की सप्लाई करने वाले मॉड्यूल का खुलासा किया है। मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें दो महिलाएं हैं। थियार सप्लाई करने वाले नेटवर्क की जांच में दो महिलाओं की भूमिका सामने आई है। चार आरोपियों को के नाम कुणाल, सुमित, राधा और बबीता है। निवासी कुणाल और सुमित हरियाणा के सोनीपत और राध-बबीता उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। पुलिस के अनुसार, कुणाल और सुमित को हरियाणा के सोनीपत से पकड़ा गया, जबकि राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के मुताबिक, कुणाल और सुमित अमृतसर से एक पिस्टल और 20 कारतूस लेकर आए थे। हथियारों की लोकेशन अनिल पंडित ने भेजी थी। दोनों महिलाओं को 10–12 हजार रुपये देकर हथियार मुंबई पहुंचाने का काम सौंपा था।

पुलिस के अनुसार हरियाणा के सोनीपत में रहने वाले कुणाल ने अपनी गर्लफ्रेंड राधा को हथियार मुंबई पहुंचाने के लिए तैयार किया था। राधा के साथ बबिता भी इस काम में शामिल बताई जा रही है। दोनों को इस काम के लिए 10 से 12 हजार रुपये दिए गए थे। हथियार कहां से लेने हैं, किसके निर्देश पर लेकर चलना है और मुंबई पहुंचने के बाद बैग किसे सौंपना है। इस पूरी कड़ी में एन्क्रिप्टेड ऐप और पहले से तय ठिकानों का इस्तेमाल किया गया था।

 पुलिस के मुताबिक, कुणाल और सुमित को करीब दो सप्ताह पहले अमृतसर से हथियार लाने का काम सौंपा गया था। उन्हें हथियार किसी व्यक्ति से सीधे नहीं लेने थे, बल्कि एक तय लोकेशन से उठाने थे। इस तरह के तरीके को ‘डेड लेटर बॉक्स’ कहा जाता है। इसमें किसी सामान या संदेश को पहले से तय स्थान पर रख दिया जाता है। दूसरा व्यक्ति वहां पहुंचकर उसे उठा लेता है। दोनों के बीच मौके पर सीधे मुलाकात होना जरूरी नहीं होता। जांच के मुताबिक, अमृतसर में जिस जगह हथियार रखे गए थे, उसकी लोकेशन अनिल पंडित ने कुणाल को पहले ही भेज दी थी। कुणाल और सुमित को कथित तौर पर यह जानकारी नहीं थी कि वहां हथियार किसने रखे थे। यानी हथियारों की सप्लाई करने वाले व्यक्ति और उन्हें उठाने वालों के बीच सीधा संपर्क नहीं हुआ था।

15 अक्टूबर को दिल्ली से मुंबई के लिए निकलीं राधा और बबिता

पुलिस के मुताबिक 15 अक्टूबर को कुणाल राधा और बबिता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन लेकर पहुंचा। बताया गया है कि पिस्टल राधा के बैग में रखी गई थी। इसके बाद दोनों महिलाएं मुंबई के लिए रवाना हुईं। कुणाल एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए संपर्क में रहा। पुलिस के अनुसार, अनिल पंडित से मिलने वाले निर्देश कुणाल के माध्यम से आगे पहुंचाए जा रहे थे। इस तरह हथियार लेकर जा रही महिलाओं और कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बीच संपर्क बनाए रखा गया। एक तरफ अमृतसर से हथियार उठाने की व्यवस्था थी, तो दूसरी तरफ दिल्ली से मुंबई तक उन्हें पहुंचाने की जिम्मेदारी. अलग-अलग लोगों को अलग-अलग काम सौंपे जाने की यह कड़ी पुलिस जांच का अहम हिस्सा है।

आरोपियों की तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर
20 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने चारों आरोपियों को हिरासत में लिया। इसके बाद मुंबई पुलिस की सीआईडी टीम ने अदालत में आरोपियों से हिरासत में पूछताछ और औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति मांगी। अदालत ने अनुमति देने के साथ तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड भी मंजूरी दे दी। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।

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