मुकेश सेन, टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से सरकारी विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां प्रशासन और नेताओं से गुहार लगाते-लगाते जब ग्रामीण थक गए तो अपनी मजबूरी और जरूरत के लिए उन्होंने खुद ही देसी लक्ष्मण झूला बना डाला। मामला मोहनगढ़ तहसील के रानीपुरा गांव का है जहां तालाब के भराव क्षेत्र में पुल न बनने के कारण ग्रामीणों ने आपस में चंदा एकत्र किया। इसके बाद प्लास्टिक के ड्रमों को रस्सियों और बांस के सहारे जोड़कर पानी पर तैरने वाला एक अस्थायी जुगाड़ का पुल तैयार कर लिया।
स्कूल से लेकर अस्पताल जाने का यही एकमात्र सहारा
यह हिलता-डुलता ड्रमों का पुल रानीपुरा के ग्रामीणों के लिए रोजाना जिंदगी का सहारा भी है और एक बड़ा खतरा भी। गांव से बाहर जाने का पक्का रास्ता कई किलोमीटर लंबा, जर्जर और कीचड़ से भरा है। ऐसे में बच्चे स्कूल जाने के लिए, मरीज अस्पताल जाने के लिए और किसान खेतों व बाजार तक पहुंचने के लिए इसी झूलते पुल पर संतुलन बनाकर आने-जाने को मजबूर हैं। इस पुल को पार करते समय जरा सा भी संतुलन बिगड़ने पर सीधे गहरे पानी में गिरने का जानलेवा जोखिम बना रहता है।

सिस्टम से उम्मीद टूटी तो खुद उठाया कदम
ग्रामीणों का कहना है कि वे इस मार्ग पर पक्के और सुरक्षित पुल के निर्माण के लिए जनप्रतिनिधियों से लेकर शासन-प्रशासन के अधिकारियों तक अनगिनत लिखित आवेदन दे चुके हैं। जब हर जगह से निराशा हाथ लगी और सरकारी सिस्टम से उम्मीद टूट गई, तब उन्होंने खुद चंदा जुटाकर यह अस्थायी व्यवस्था की। सवाल यही उठता है कि क्या रानीपुरा के लोगों को एक सुरक्षित और स्थायी पुल के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार करना पड़ेगा?

मामला संज्ञान में आया, जल्द करेंगे समाधान: जिला पंचायत CEO
इस पूरे मामले में टीकमगढ़ जिला पंचायत सीईओ का बयान सामने आया है। उन्होंने स्वीकार किया कि ग्रामीणों ने ड्रमों के ऊपर एक पुलनुमा आकृति बनाई है, जिस पर चलकर वे तालाब पार कर रहे हैं। सीईओ ने कहा कि इस पूरे मामले को संज्ञान में ले लिया गया है और ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द समाधान कराया जाएगा।

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