प्रदीप मालवीय, उज्जैन। उज्जैन केंद्रीय जेल में महालय महाश्राद्ध के मौके पर बंदियों के लिए तर्पण और पिंडदान कराया गया । जेल प्रशासन के सहयोग से हुए इस धार्मिक आयोजन में करीब 200 से 250 बंदियों ने अपने पितरों की शांति के लिए विधि-विधान से तर्पण किया ।

लेकिन इस आयोजन के बीच एक बंदी की कहानी ने सबका ध्यान खींचा । बंदी ने बताया कि साल “2021” में एक हादसे में उसके हाथों एक व्यक्ति की मौत हो गई थी । तब से हर साल वह उस व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करता है ।

बंदी का कहना है कि वह इन दिनों में मृत व्यक्ति को याद करता है और मन ही मन उससे क्षमा मांगता है । उसके नाम से गौशाला में चारा और दूसरी सेवा भी करवाता  है । उसका कहना है कि वह चाहता है कि उस व्यक्ति की आत्मा को शांति मिले और उसे भी अपने किए का प्रायश्चित करने का अवसर मिले ।

जेल में करीब 10-11 वर्षों से तर्पण करा रहे आचार्य श्याम पंचोली ने बताया कि बंदियों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन के सहयोग से यह आयोजन कराया जाता है । इसमें बंदी अपने पितरों और दिवंगत लोगों की शांति के लिए तर्पण करते है । 

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