प्रदीप मालवीय, उज्जैन। सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा से पहले मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह उज्जैन पहुंचे। जहां उन्होंने मां हरसिद्धि मंदिर, काल भैरव मंदिर और बड़े गणेश मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। दिग्विजय ने आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में लगकर दर्शन किए। वहीं 20 अक्टूबर से यात्रा की शुरुआत करेंगे। यह यात्रा शिवधाम उज्जैन से रामधाम अयोध्या तक जाएगी।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा से पहले धर्मनगरी उज्जैन पहुंचे थे। जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया। उज्जैन प्रवास के दूसरे दिन प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। दिग्विजय सिंह ने सबसे पहले मां हरसिद्धि मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए। इसके बाद काल भैरव मंदिर और बड़े गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में लगकर दर्शन किए।
20 अक्टूबर से यात्रा की शुरुआत
दिग्विजय सिंह महाकाल की नगरी उज्जैन से राम की नगरी अयोध्या तक सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा निकालेंगे। इसकी शुरुआत 20 अक्टूबर मंगलवार को महाकालेश्वर मंदिर से होगी। यात्रा को लेकर तैयारियां बड़े स्तर पर चल रही है। खास बात तो यह है कि दिग्विजय सिंह ने यह स्पष्ट किया है कि यह यात्रा राजनीतिक नहीं है। इस यात्रा में कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है। इसे लेकर आज सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। इस दौरान कार सेवक संतोष दुबे भी मौजूद रहे।
दिग्विजय ने प्रेस वार्ता में संतोष दुबे के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 2 नवंबर 1990 की कारसेवा के दौरान उन्हें चार गोलियां लगी थीं। वहीं 6 दिसंबर 1992 की घटना में वे घायल हुए और उनकी कई हड्डियां टूट गई थीं। वे राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े चर्चित पूर्व कारसेवकों में गिने जाते हैं। सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा में संतोष दुबे भी शामिल होंगे।
प्रेस वार्ता के माध्यम से दिग्विजय सिंह ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य पांच मांगे हैं…
- श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाये और श्रीराम मंदिर की व्यवस्था का दायित्व पूर्व में बने रामालय ट्रस्ट को सौंपा जाए, जिसमें सभी पीठों के पूज्य शंकराचार्य गण, रामानंद संप्रदाय के संत गण, निर्मोही अखाड़े के प्रमुख एवं गोरखनाथ मठ के प्रतिनिधि विशेष रूप से सम्मिलित हों।
- राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी की ताजा घटनाओं में ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव, कोषाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज करवाया जाए तथा उन्हें भी आरोपी बनाया जाए।
- राम मंदिर ट्रस्ट में किसी भी राजनेता या सांप्रदायिक संगठनों के सदस्यों को न तो पदाधिकारी बनाया जाये और न ही उन्हें कोई दायित्व सौंपा जाए।
- देश के प्रधानमंत्री राम मंदिर में हुई चोरी और श्रद्धालुओं की आस्था पर पहुंची गंभीर चोट के विषय में मौन साधे हुए हैं। उनका यह मौन अनेक स्वाभाविक प्रश्न और संदेह उत्पन्न करता है, क्योंकि शास्त्रों में कहा गया है- “मौनं स्वीकृति लक्षणम् ।”
- प्रधानमंत्री को हमारी मांगों के अनुरूप निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, पूरे प्रकरण में पारदर्शिता स्थापित करनी चाहिए और यह सिद्ध करना चाहिए कि आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार की लूट, भ्रष्टाचार या अनियमितता को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। ऐसा कर वे न्याय, जवाबदेही और धार्मिक आस्था के सम्मान का एक उत्कृष्ट तथा न्यायसंगत उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।
महाकाल मंदिर के पास सरकारी भूमि पर RSS का कब्जा- दिग्विजय सिंह
पूर्व सीएम दिग्विजय ने प्रेस वार्ता में वोट चोरी और चंदा चोरी पर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग को लेकर एक डिजिटल पिटीशन की भी चर्चा की। दिग्गी ने कहा कि मैं लोकतंत्र व्यवस्था का समर्थन करता हूं। देश में निष्पक्ष चुनाव के पक्ष में हूं। राजनीति में धर्म का उपयोग एक हथियार के रूप में करने का पक्षधर नहीं हूं। EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाना चाहिए। इन मांगों पर अपना समर्थन दर्ज करने के लिए एक मोबाइल नंबर (8982121282) जारी किया गया, जिस पर मिस कॉल करने की अपील की गई है। प्रेस वार्ता में दिग्विजय सिंह ने महाकाल मंदिर के निकट की शासकीय भूमि पर आरएसएस का कब्जा और होटल निर्माण कर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने के भी आरोप लगाए, इसके उन्होंने प्रमाण भी दिए।

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