प्रदीप मालवीय, उज्जैन। धर्म नगरी उज्जैन में शारदीय नवरात्रि के महाष्टमी पर सोमवार सुबह 8 बजे से ऐतिहासिक और प्राचीन नगर पूजा का भव्य शुभारंभ किया गया। उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने 24 खंबा स्थित माता महामाया और महालया के दरबार पहुंचकर विधि-विधान से मदिरा का भोग लगाया और विशेष पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात माता की महाआरती की गई। इस प्राचीन परंपरा के तहत 24 खंबा माता मंदिर से शुरू हुई यह नगर पूजा यात्रा 27 किलोमीटर लंबे मार्ग से गुजरते हुए शहर के प्रमुख 40 देवी एवं भैरव मंदिरों तक पहुंचेगी।

सम्राट विक्रमादित्य ने की थी 2100 साल पुरानी इस परंपरा की शुरुआत

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उज्जैन में नगर पूजा की यह अनूठी परंपरा करीब 2100 साल पुरानी है। इसकी शुरुआत महान सम्राट विक्रमादित्य ने अपने नगर व राज्य की खुशहाली, सुख-समृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं व प्रकोप से रक्षा के लिए की थी, जिसका निर्वहन आज भी पूरी श्रद्धा के साथ किया जा रहा है। सिंधिया स्टेट के समय भी यह गौरवशाली परंपरा कायम रही और आजादी के बाद से मध्य प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन इस परंपरा का लगातार निर्वहन कर रहा है। इस पूरी नगर पूजा का सारा खर्च शासन और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उठाया जाता है।

27 किमी तक सतत बहेगी मदिरा की धार

नगर पूजा की इस विशेष यात्रा के दौरान पूरे नगर की परिक्रमा के वक्त आगे चल रही हांडी से लगातार 27 किलोमीटर तक मदिरा की धार सतत बहती रहती है। यह यात्रा कालभैरव, भूखी माता, चामुंडा माता और गढ़कालिका मंदिर समेत कुल 40 प्रमुख देवी व भैरव मंदिर तक पहुंचेगी। इस दौरान यात्रा में साथ चल रहे कोटवार व अन्य शासकीय दल द्वारा माता और भैरव को भजिए, पूरी, बड़बाकुल, भीगे हुए गेहूं-चने के घुघरी का भोग अर्पित किया जाएगा। साथ ही माता मंदिरों में 16 श्रृंगार की सामग्री और चुनरी भी भेंट की जाएगी।

मान्यता है कि इस 27 किलोमीटर लंबे मार्ग पर मदिरा और अन्य भोग अर्पित करने से नगर में मौजूद अतृप्त आत्माओं को तृप्ति मिलती है, जिससे वे प्रसन्न होकर पूरे शहर को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इस पूरी यात्रा के दौरान अलग-अलग मंदिरों में तामसिक और सात्विक दोनों प्रकार की पूजा की परंपरा है। जहां कुछ देवी व भैरव मंदिरों में मदिरा और दही अर्पित किया जाता है, वहीं हनुमान मंदिरों में नारियल, तेल, सिंदूर और ध्वज अर्पण किया जाता है। सुबह 8 बजे शुरू हुई यह नगर पूजा रात 8 बजे गढ़कालिका मंदिर होते हुए अंकपात मार्ग स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर पर पूजन के साथ समाप्त होगी।

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