प्रदीप मालवीय, उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में 12 दिन तक मंगल मूर्ति श्री गणेश की मनुहार के बाद शुक्रवार को बप्पा को विदाई दी गई। सुबह से रात तक घरों, पंडालों से शिप्रा तट तक विसर्जन शोभायात्रा का सिलसिला चलता रहा। अनंत चतुर्दशी की रात को झिलमिलाती झांकियों से शहर रोशन हो उठा। यहां 5 झाकियां निकाली गई, इनमें 2 नगर निगम और एक पीएचई की ओर से बनवाई गई थी।
पहली झांकी ब्रह्मा-विष्णु और महेश के नृत्य को समर्पित रही। इसमें ब्रह्मपुरी में ब्रह्मा नाचे, शिव नाचे कैलाश, गीत पर नृत्य होता दिखाई दिया। दूसरी झांकी भगवान नृसिंह अवतार की रही। इसमें खंभे से प्रकट होते हुए भगवान नृसिंह दिखाई दिए। वहीं तीसरी झांकी में पीएचई विभाग ने देवी महाकाली के रौद्र रूप का प्रदर्शन किया। चौथी झांकी में वीर हनुमान के संजीवनी की खोज में जाने और पर्वत उठा ले जाने का दृश्य रहा। पांचवीं झांकी चिंतामन गणेश मंडल की रही।
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10 दिवसीय गणेश उत्सव के समापन के साथ ही देर रात तक निकला यह झांकियों का कारवां देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे थे। लोग छोटे-छोटे बच्चों को अपने कंधों पर उठाएं रंग बिरंगी लाइटों से सजी या झांकियां दिखाने के लिए लाए थे। इस दौरान लक्ष्मी नगर निवासी कनिष्का बैंडवाल ने 10 दिन तक गणपति बाबा को घर पर विराजमान कर पूजा अर्चना की, तो वहीं अनंत चतुर्दशी पर भगवान गणेश को छप्पन भोग लगाया और अपने माता-पिता व परिवार के साथ पूजा अर्चना कर बप्पा को विदा किया।
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