देहरादून. पूर्व सीएम हरीश रावत ने अपने और जनता के बीच जुड़ाव को लेकर अपना भाव प्रकट किया है. उन्होंने कहा किउम्र बढ़ रही है, मगर हरिद्वार के साथ मेरा रोमांस भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ रहा है. वर्ष 2009 से 2014 के उस हिस्से तक जब मैं लोकसभा में हरिद्वार का प्रतिनिधित्व करता था, मेरे जीवन का स्वर्णिम काल था. मतदाता और प्रतिनिधि के रूप में हम एक-दूसरे में इतने घुल-मिल गए थे, जिस प्रकार दूध में चीनी और छाछ में पानी मिलने के बाद उसको अलग पहचानना कठिन होता है. हम एक-दूसरे के पर्याय बन गए थे. सैकड़ों घरों से मेरा व्यक्तिगत, पारिवारिक रिश्ता बना जो आज भी कायम है. हजारों-हजार भाई-बहनों से प्रेम, सौहार्द और कर्तव्य के रिश्ते बने, जो आज भी जारी हैं.

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हरीश रावत ने कहा कि मेरे दिल में एक इच्छा सी उठ रही है कि क्या मैं एक बार हरिद्वार का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता? मैं एक बार विधानसभा को हरिद्वारमय करना चाहता हूं. बहुत सारी सोच, प्लानिंग मेरे मन में हरिद्वार के लिए हैं. मैं उत्तराखंड का संबल, उत्तराखंड का पिलर, हरिद्वार का निर्माण करना चाहता हूं. लोग भी चाहते हैं. सोलानी के इस पार के लोगों के मन में यह बलवती भावना है कि हम एक बार हरिद्वार से एक बार हरीश रावत को विधानसभा में भेजें.

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आगे हरीश रावत ने ये भी कहा कि जब मैं राज्य के सामने समग्र सवालों को, जिसमें पार्टी के आंतरिक सवाल भी सम्मिलित हैं, ध्यान में लाता हूं और विवेचन करता हूं तो मुझे अपनी भावना दबानी पड़ती है. लेकिन मैं इतना तो कर सकता हूं कि हरिद्वार से इस बार फिर एक सुदृढ़, विवेकशील, समन्वयकारी, सबको मिलाकर चलने वाला नेतृत्व विधानसभा में पहुंच सके. मगर यह तय है कि जब तक मुझ में सांस है, ‘पत्रं पुष्पं’ की तरह ही सही मैं हरिद्वार की सेवा करता रहूंगा और अल्मोड़ा को ध्यान में रख करके करूंगा, कोई चीज छिपा करके नहीं. वैसे भी मेरा प्यार छिपा हुआ प्यार नहीं था, खुल्लम-खुल्ला प्यार था, वह यथावत खुल्लम-खुल्ला रहेगा.