देहरादून. बीते दिनों यूपी के अमरोहा में एक फार्म हाउस में महिला के साथ गैंगरेप की वारदात सामने आई थी. जिसे लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि अमरोहा के फार्म हाउस में हुए जघन्य अपराध की अभी कई परतें खुलनी बाकी लग रही हैं. ये तो उत्तर प्रदेश की पुलिस के सम्मुख चुनौती है कि वो बिना प्रभाव में आए किस प्रकार अपराधियों और अपराध में सहयोग, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर सहयोग देने वाले लोगों तक पहुंचती है. मगर एक लैसन जो मुझे लगता है हमने अंकिता हत्याकांड के बाद भी नहीं सीखा है, वो है कि एक स्ट्रिक्ट एसओपी रिजॉर्ट्स और रिजॉर्ट-कम-ओनरशिप वैयक्तिक फार्म हाउसेस और तथाकथित विश्राम स्थलों के लिए भी बननी चाहिए.

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आगे हरीश रावत ने कहा कि हमारे राज्य में भी ऐसे सैकड़ों घर बने हैं, इस दौरान जिनमें आने वालों का कोई रिकॉर्ड राज्य पुलिस के पास नहीं होता है. क्या ये उचित नहीं रहेगा कि हम उन लोगों से उनके परिवार के सदस्यों की पूरी डिजिटल जानकारी लें? रिश्तेदारों की जानकारी लें और उसके अलावा उनके लिए ये अनिवार्य करें कि यदि कोई बाहरी गेस्ट वहाँ आ रहा है तो उसकी सूचना स्थानीय पुलिस स्टेशन में दी जाए, ताकि पुलिस उसके आगमन को स्क्रीन कर सके.

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आगे हरीश रावत ने ये भी कहा कि इन घरों को यदि लोगों ने प्लेजर हाउसेस के रूप में बदला तो इससे हमारी संस्कृति के विकृत होने की बहुत बड़ी आशंका है और मैं समझता हूं सरकार की कमी से राह तो खुल चुकी है. ये लग्जरी हाउसेस प्लेजर हाउसेस में बदलने की और ऐसे लोगों की भी राज्य में कमी नहीं है, जो देह-सुख उपलब्ध करवाकर राजनीति करने का काम करते हैं और अपना असर बढ़ाते हैं. यदि हम नहीं चेते, हमने स्ट्रिक्ट रूल्स-रेगुलेशन नहीं बनाए तो भविष्य में कोई अमरोहा फार्म हाउस कांड उत्तराखंड में भी घटित हो सकता है.