देहरादून. हरीश रावत का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि सुबोध उनियाल उवाच ‘डेनिस’ को घोटाला मानते हैं और उसका दोष मुझ पर मढ़ना चाहते हैं. मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वे इसकी जांच कराएं. मैंने जो जानकारी इकट्ठा की है, उसके अनुसार दून वैली डिस्टिलर्स’ और ‘हाईलैंड एंड बॉटलर्स’ आज भी सरकार के संरक्षण में काम कर रही हैं और शराब की बिक्री कर रही हैं. डेनिस आर्मी कैंटीनों में धड़ल्ले से बिक रही है, तो यदि उस समय की डेनिस गलत थी, तो आज कैसे सही है? क्या केवल इसलिए सही है कि आज भाजपा की सरकार है?
हरीश रावत ने कहा कि एक चूक, जो विश्वास आधारित थी, वह अवश्य हुई. मेरे सलाहकार इस बात को कैसे नोट नहीं कर पाए कि जीएमवीएन (गढ़वाल मंडल विकास निगम), जो एक सरकारी उपक्रम है, जिसे लाभ में लाने व खड़ा करने के लिए हमने गढ़वाल मंडल में शराब की बिक्री का पूरा दायित्व दिया था और केएमवीएन (कुमाऊं मंडल विकास निगम) जिसे कुमाऊं में दायित्व दिया था वे कैसे ‘डेनिस’ की लपेट में आ गए?
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उन्होंने ये भी कहा कि क्यों तीन-चार महीने तक दूसरे ब्रांड्स को ब्लॉक किया गया? जनहित में जारी हमारे एक आदेश का सहारा लेकर किस प्रकार यह भ्रष्ट कृत्य हुआ कि चार महीने तक अन्य ब्रांड ब्लॉक रहे? हमारा आदेश स्पष्ट था कि ऐसे डिस्टिलर्स, जो डिस्टिलेशन प्रोसेस में उत्तराखंड के फल और सब्जियों का उपयोग करेंगे, उन्हें शराब की दुकानों में 20% का रिज़र्व मार्केटिंग राइट दिया जाएगा. जब अधिकार 20% का था, तो किन कारणों से और बीच में ऐसे कौन लोग थे, जिन्होंने तीन-चार महीने तक उसे लगभग 70-80% में बदल दिया? उनियाल चाहें तो इसकी जांच करें, मुझे कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन उन्हें इस बात की भी जांच करनी पड़ेगी कि आज भी ‘डेनिस’ कैसे उसी धड़ल्ले से बिक रही है, जितनी उस समय बिक रही थी. उस समय तो यह कुछ ही समय के लिए बिकी थी और सत्यता यह है कि मैं ‘डेनिस’ नाम से परिचित भी नहीं था.
हरीश रावत ने ये भी कहा कि बहुत दिनों तक मैं ‘डेनिस’ को ‘डेनिम’ कह देता था, लेकिन भाजपा के दोस्तों ने बार-बार याद दिला दिया, तो अब मुझे अवश्य यह नाम रट गया है. भाजपा के दोस्त तो केवल तीन-चार महीने के चहेते रहे और वह भी मेरी वजह से नहीं, बल्कि जीएमवीएन और किसी अन्य की कारीगरी व मिलीभगत के कारण संभव हुआ. ज्यों ही मेरे ध्यान में यह तथ्य आया मैंने सारी प्रक्रिया बदल दी, तो आज भी भाजपा सरकार ‘डेनिस’ को अपने आशीर्वाद से गदगद कर रही है. यह ‘मेरा डेनिस, तेरा डेनिस’ नहीं होना चाहिए. यदि कहीं कोई गलती हुई है, किसी ने प्रक्रिया का लाभ उठाकर शोषण किया है, तो उसके खिलाफ इंक्वायरी होनी चाहिए और सरकार हिम्मत करे.
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हरीश रावत ने कहा कि आज तो सरकार में सुबोध उनियाल हैं, वे इसमें जांच बिठाएं, एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करें. मुझे कोई ऐतराज नहीं है और मैं खुद को उस टास्क फोर्स के सम्मुख प्रस्तुत होने के लिए ऑफर करता हूं, लेकिन मुझसे बार-बार भाजपा के लोग ‘डेनिस-डेनिस’ न कहें, क्योंकि आज तो उनके चारों तरफ सिर्फ ‘डेनिस’ ही नहीं है; ‘हिलटॉप’ भी है, ‘काफल’ भी है, ‘माल्टा’ भी है, ‘संतरा’ भी है. पता नहीं पहाड़ी नींबू भी कर दिया हो या हो सकता है कि गेंठी और अन्य फलों के नाम पर भी शराब बिक रही हो. आप तो कई विभूतियों को पोषित कर रहे हैं.

