देहरादून. अखिलेश यादव के घुसपैठिए वाले बयान पर पूर्व सीएम हरीश रावत का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने एक दुर्भाग्यजनक टिप्पणी की है. टिप्पणी करते वक्त उनके मानस पटल पर योगी आदित्यनाथ जी का चित्र रहा होगा. वह यह भूल गए कि हम कभी एक राज्य थे. कुछ दुर्भाग्यजनक घटनाओं के बाद बंटवारे के समय में एक सौहार्दपूर्ण वातावरण रहा.
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आगे उन्होंने कहा कि जब राज्य एक था, तो किसी ने अपना कर्मक्षेत्र नैनीताल, उधमसिंहनगर, अल्मोड़ा, टिहरी, पौड़ी चुना, तो किसी ने अपना कर्मक्षेत्र इलाहाबाद, गोरखपुर, बनारस, लखनऊ चुना या और स्थान चुने. यह सिद्धांत है कि बंटवारे के वक्त जो जहां रह गया, वहीं का वासी है. वह वहां का सम्मानित बाशिंदा है और पूर्ण और समान रूप से हकदार है.
हरीश रावत ने कहा कि जो लोग उत्तराखंड में रह गए, वे उत्तराखंड में पूर्ण रूप से सम्मानित हैं और हकदार हैं, और जो उत्तर प्रदेश में रह गए, वे उत्तर प्रदेश में सम्मानित और हकदार होने चाहिए, तो यह ‘घुसपैठिया’ शब्द उन नागरिकों पर किसी भी रूप में लागू नहीं होता है और देश के अंदर इस प्रांत के लोग उस प्रांत में, उस प्रांत के लोग किसी और प्रांत में काम करने जाते हैं.
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हरीश रावत ने ये भी कहा कि देश के निर्माण में ऐसे प्रवासी लोगों या दूसरे प्रांतों से उन प्रांतों में गए हुए लोगों का बहुत बड़ा योगदान है और उनके योगदान को सम्मानपूर्वक देखा जाता है, तो राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में हम ‘घुसपैठिए’ जैसे दुर्भाग्यपूर्ण शब्द का उपयोग किसी रूप में भी वांछित नहीं पाते हैं. भाजपा तो ‘घुसपैठिया’ शब्द का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग करती है. हमें उनके उकसावे में आने की आवश्यकता नहीं है.

