उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में मंगलवार 27 अक्टूबर 2026 से उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र (Uttarakhand Legislative Assembly Session 2026) का आगाज हो गया है. यह सत्र 27 और 28 अक्टूबर 2026 को दो दिन तक चलेगा. सत्र की शुरुआत में सीएम धामी समेत पूरे सदन ने पूर्व सीएम दिवंगत बीसी खंडूड़ी को याद किया. इस बीच आज सत्र में खानपुर विधायक उमेश कुमार ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. वे कल यानी बुधवार को विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देंगे. उन्होंने अपने फैसले के पीछे किसानों के मुद्दे पर विपक्ष का साथ नहीं मिलने को वजह बताया है.
उमेश कुमार का कहना है कि हरिद्वार में किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं, लेकिन इस मुद्दे पर उनके साथ कोई खड़ा नहीं हुआ. उमेश कुमार ने इस ऐलान के साथ कांग्रेस और भाजपा, दोनों से दूरी बनाए रखने का संदेश भी दिया. उन्होंने साफ कहा कि वह न कांग्रेस में जा रहे हैं और न भाजपा में. उनका कहना है कि वह उन नेताओं के समर्थन में नारे नहीं लगा सकते, जो कल तक उनके दरवाजे पर आकर बैठते थे.
इसे भी पढ़ें : ‘कब तक व्यक्तिगत अपमान के सहारे चलेगी राजनीति?’ खड़गे के बयान पर धामी का वार, कहा- राजनीतिक विरोध की भी एक मर्यादा होती है
विधानसभा सत्र से ठीक पहले इस्तीफे का ऐलान इसलिए भी अहम है, क्योंकि सदन में सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना है. ऐसे समय में एक निर्दलीय विधायक का विपक्ष से समर्थन नहीं मिलने की बात कहकर सदस्यता छोड़ने का ऐलान करना किसानों के मुद्दे पर विपक्षी रणनीति और सदन के भीतर विपक्षी एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है. राजनीतिक गलियारों में इस पर चर्चाएं तेज हो गई है. हालांकि सवाल उठना लाजमी भी है. क्योंकि एक तरफ विपक्ष लगातार किसानों के साथ खड़े होने की बात करता है. लेकिन विधायक का बयान कुछ और ही बयां कर रहा है.

