झारखंड सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक सराहनीय और दूरगामी पहल की है। राज्य के सरकारी स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ अब उन बच्चों के माता-पिता को भी पढ़ाया जाएगा, जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते हैं। सरकार ने ऐसे निरक्षर माता-पिता के लिए स्कूल परिसरों में ही अलग से कक्षाएं चलाने का फैसला किया है। यह पहल ‘उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत शुरू की जा रही है। इसके साथ ही 15 साल से अधिक उम्र के अन्य असाक्षर लोगों को भी चिन्हित कर उन्हें पढ़ना-लिखना, गिनती और रोज़मर्रा की ज़रूरी बातें सिखाई जाएंगी. इस योजना की शुरुआत झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले से की गई है. इसके लिए सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं.
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य केवल बच्चों तक शिक्षा को सीमित रखना नहीं है, बल्कि पूरे परिवार को साक्षर बनाना है। कई बार देखा गया है कि निरक्षर माता-पिता बच्चों की पढ़ाई में सहयोग नहीं कर पाते, जिससे बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होती है। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने यह अभिनव कदम उठाया है।
इस अभियान का लक्ष्य झारखंड को पूरी तरह साक्षर बनाना है. इसके लिए उल्लास ऐप के ज़रिए ऑनलाइन सर्वे किया जाएगा. सभी स्कूलों को अपने क्षेत्र के असाक्षर लोगों की पहचान कर उनकी जानकारी ऐप पर अपलोड करनी होगी. जमशेदपुर जिले के सरकारी स्कूलों में सत्र 2026-27 से बच्चों के साथ-साथ उनके असाक्षर माता-पिता के लिए भी नियमित कक्षाएं शुरू की जाएंगी. इस योजना के तहत सोमवार से शनिवार तक रोज एक घंटे क्लास चलेंगी, ताकि माता-पिता भी पढ़ना-लिखना, गिनती और जीवन से जुड़ी ज़रूरी जानकारी सीख सकें.
उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षित शिक्षक, स्वयंसेवक और शिक्षा मित्र इन कक्षाओं का संचालन करेंगे। खास बात यह है कि पढ़ाई का तरीका पूरी तरह सरल और व्यवहारिक होगा, ताकि माता-पिता बिना किसी संकोच के सीख सकें। राज्य सरकार का कहना है कि इस योजना से न सिर्फ साक्षरता दर बढ़ेगी, बल्कि स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भी कमी आएगी। साथ ही अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जिससे बच्चों की नियमित उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार होगा।
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