उत्तर प्रदेश सरकार ने चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लंबाई करीब 322 किलोमीटर होगी. इस परियोजना पर 17,542 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इससे प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट तथा बुंदेलखंड क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में चार नए लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. करीब 322 किलोमीटर लंबे इन चार मार्गों के निर्माण पर 17,542 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस परियोजना के पूरा होने से आगरा-लखनऊ, गंगा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे आपस में जुड़ जाएंगे. साथ ही जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी.

चार लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण

प्रस्तावित परियोजना के तहत चार अलग-अलग लिंक एक्सप्रेसवे बनाए जाएंगे. इनकी लंबाई का विवरण इस प्रकार है.

  • फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे – 90.90 किलोमीटर.
  • आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे – 50.94 किलोमीटर.
  • झांसी लिंक एक्सप्रेसवे – 106 किलोमीटर.
  • जेवर लिंक एक्सप्रेसवे – करीब 74 किलोमीटर.

इन सभी की कुल लंबाई लगभग 322 किलोमीटर होगी.

चारों दिशाओं में कनेक्टिविटी

फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को फर्रुखाबाद के रास्ते गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा. इससे इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद और हरदोई के लोगों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है.

आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे दोनों प्रमुख मार्गों के बीच सीधा संपर्क बनाएगा. इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वांचल जाने वाले वाहनों को लखनऊ के शहरी यातायात से गुजरने की जरूरत कम होगी.

झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए बुंदेलखंड क्षेत्र को एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. इससे बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र और रक्षा औद्योगिक गलियारे तक सामान पहुंचाना आसान होगा.

वहीं, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा. इससे यमुना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-एनसीआर के साथ एयरपोर्ट का संपर्क भी बेहतर होगा.

किसानों और कारोबार को फायदा

अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार के मुताबिक, इस परियोजना का बड़ा लाभ किसानों और कृषि उत्पादों के कारोबार को मिलेगा. लिंक एक्सप्रेसवे बनने के बाद दूध के टैंकर, फल-सब्जियों से भरे रेफ्रिजरेटेड वाहन और अन्य मालवाहक वाहनों को तेज आवागमन की सुविधा मिलेगी.

इस कॉरिडोर से अलग-अलग क्षेत्रों के बीच यात्रा में तीन से छह घंटे तक की बचत होने का अनुमान है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के डेयरी उत्पाद, आलू, फल और सब्जियां कम समय में लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी सहित दूसरे बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे.

इसी तरह पूर्वांचल और बुंदेलखंड के कृषि उत्पादों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा. इससे दूध और जल्दी खराब होने वाले अन्य उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

उद्योगों को भी मिलेगा लाभ

बेहतर कनेक्टिविटी से खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नए अवसर बनने की संभावना है. औद्योगिक इकाइयों को कच्चा माल मंगाने और तैयार उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में भी सहूलियत होगी.

इस तरह चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने के साथ कृषि, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है.