मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी के चर्चित मामले में पुलिस की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है. पुलिस ने चार्जशीट लगभग तैयार कर ली है और 22 सितंबर को 90 दिन की अवधि पूरी होने से पहले कोर्ट में दाखिल करेगी. पुलिस के अनुसार, मामले से जुड़े साक्ष्यों, आरोपियों की भूमिका और बरामदगी की जांच पूरी कर ली गई है. अब चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी चल रही है.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले में अगले दो दिनों में चार्जशीट दाखिल की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी.यूपी सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दी जानकारी…दो दिन में चार्जशीट दाखिल करने की बात. मामले की जांच एसआईटी कर रही है. चार्जशीट दाखिल होने के बाद जांच से जुड़े तथ्यों की तस्वीर और स्पष्ट होगी.
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रामजन्मभूमि थाने में 25 जून को 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी. इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र शामिल हैं. पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. आरोपियों पर मंदिर से चोरी, कर्मचारी के तौर पर संपत्ति की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति को छिपाने या उसका इस्तेमाल करने में मदद, आपराधिक साजिश और साझा मंशा से अपराध करने जैसी धाराओं में कार्रवाई की गई है.
पुलिस ने बताई आरोपियों की अलग-अलग भूमिका
पुलिस के मुताबिक, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना किसी औपचारिक आदेश के दानपात्रों की चाबियां थीं. अनुकल्प मिश्र और लवकुश मिश्र नकदी की गिनती से जुड़े थे. पुलिस का दावा है कि अनुकल्प के घर से करीब 20 लाख और लवकुश के घर से करीब 10 लाख रुपए बरामद हुए. मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र भी नकदी की गिनती से जुड़े बताए गए हैं. पुलिस के अनुसार अविनाश शुक्ल के बैंक खाते से 5 लाख रुपए की रिकवरी हुई थी.
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CCTV और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जुटाए
पुलिस ने मंदिर परिसर के CCTV फुटेज की जांच की. चढ़ावे की गिनती से जुड़े रजिस्टर और कर्मचारियों के बयान भी जांच में शामिल किए गए. इसके अलावा फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जुटाया गया है. चार्जशीट में चोरी की कथित कार्यप्रणाली, आरोपियों की भूमिका और उनसे हुई बरामदगी का विवरण शामिल किया जाएगा. वरिष्ठ अधिवक्ता शिवम् पांडेय के मुताबिक, जिन मामलों में कानून के तहत 90 दिन में चार्जशीट दाखिल करना जरूरी होता है, वहां समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने पर आरोपी को वैधानिक यानी डिफॉल्ट बेल का अधिकार मिल सकता है.



