उत्तर प्रदेश के 558 अनुदानित मदरसों में नियम विरुद्ध नियुक्तियों, अभिलेखों में हेरफेर और वित्तीय अनियमितताओं समेत 35 बिंदुओं पर प्रारंभिक जांच शुरू हुई है. करीब 1,100 करोड़ रुपये के सालाना सरकारी बजट से जुड़े इस मामले में कोविड काल की नियुक्तियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश पुलिस के भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने राज्य के 558 अनुदानित मदरसों में कथित अनियमितताओं की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है. करीब 1,100 करोड़ रुपये के सालाना सरकारी बजट से जुड़े इस मामले में नियम विरुद्ध नियुक्तियों से लेकर अभिलेखों में हेरफेर और वेतन भुगतान में अनियमितताओं समेत 35 बिंदुओं को जांच के दायरे में रखा गया है.

जांच में कोविड काल के दौरान हुई नियुक्तियों को भी शामिल किया जा सकता है. प्रबंध समितियों के जरिए किए गए वित्तीय निर्णयों और उनसे जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा सकती है.

333 पन्नों की शिकायत

गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भ्रष्टाचार निवारण संगठन को भेजी गई 333 पन्नों की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ मदरसों में निर्धारित नियमों की अनदेखी कर नियुक्तियां की गईं. शिकायत में शिक्षकों की योग्यता, छात्रों की संख्या, प्रबंध समितियों की वैधता और संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं.

शिकायत के साथ आरटीआई से प्राप्त सूचनाएं, विभागीय पत्राचार, जांच से जुड़े दस्तावेज और विभिन्न शिकायतों के अभिलेख भी लगाए गए हैं. इनमें सोसायटी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और फर्जी हस्ताक्षरों के आरोपों की जांच कराने के साथ सरकारी धन से किए गए वेतन भुगतान की फॉरेंसिक जांच की मांग की गई है.

चंदे की भी जांच मांग

शिकायत में सरकारी अनुदान के अलावा चंदा, जकात, सदका और फितरा से प्राप्त धनराशि में कथित हेरफेर के आरोप भी लगाए गए हैं. इन मामलों की जांच कराने की मांग की गई है.

शिकायतकर्ता मोहम्मद तलहा ने अलग-अलग जिलों के मामलों का हवाला देते हुए अनियमितताओं के तौर-तरीकों में समानता का दावा किया है. इसी आधार पर शिकायत में किसी संगठित नेटवर्क की आशंका जताई गई है.

17 अगस्त को जांच आदेश

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि कुछ मामलों में विभागीय जांच होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई. कथित तौर पर जांच रिपोर्टों को दबाए जाने के आरोपों की भी पड़ताल कराने का आग्रह किया गया है.

शिकायत का संज्ञान लेते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन के महानिरीक्षक मोहित गुप्ता ने 17 अगस्त को मामले की जांच का आदेश उपमहानिरीक्षक हरिश्चन्दर को दिया. इसके बाद मामले की गहराई से जांच शुरू हो गई है.

नियमों के मुताबिक, भ्रष्टाचार निवारण संगठन किसी मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने से पहले गोपनीय जांच करता है. इस मामले में भी यह प्रक्रिया शुरू हो गई है.

रिकॉर्ड की होगी पड़ताल

जांच के दौरान नियुक्तियों, सरकारी अनुदान और वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सकती है. जांच आगे बढ़ने पर पुराने मामलों की भी दोबारा समीक्षा हो सकती है.

हालांकि, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक शीलधर यादव का कहना है कि उन्हें जांच शुरू होने का अभी आधिकारिक आदेश नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि अगर जांच एजेंसी जानकारी मांगेगी तो उसे उपलब्ध कराया जाएगा.