मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. रामनगरी अयोध्या में जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्राचीन धार्मिक स्थलों, मंदिरों और कुंडों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है, वहीं मोहबरा धाम स्थित पौराणिक श्री महाभारसर कुंड बदहाली और उपेक्षा का दंश झेल रहा है. कुंड तक जाने वाला मुख्य रास्ता बंद है, अंग्रेजों के जमाने का ऐतिहासिक 65वां शिलालेख उखाड़कर दुकान पर रख दिया गया है और आसपास की जमीन पर कब्जे की आशंका गहरा गई है. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि भूमाफियाओं की नजर इस ऐतिहासिक कुंड की जमीन पर है. शिकायतों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
कुंड की दुर्दशा को लेकर केंद्रीय विद्यालय बस्ती के पूर्व प्राचार्य संत लाल करुण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्पीड पोस्ट के माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजकर इसके उद्धार की गुहार लगाई है. उन्होंने मांग की है कि राजस्व विभाग से कुंड की विधिवत पैमाइश कराई जाए, कथित अतिक्रमण की जांच हो, बंद पड़े मुख्य रास्ते को खुलवाया जाए और ऐतिहासिक धरोहर का जीर्णोद्धार कराया जाए.
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संत लाल करुण के अनुसार, श्री महाभारसर कुंड का उल्लेख गीता प्रेस से प्रकाशित उस पुस्तक में मिलता है, जिसमें रुद्रयामल के शिव-पार्वती संवाद और स्कंद पुराण का संकलन है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कुंड भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा पौराणिक स्थल है. ऐसे में इसका महत्व अयोध्या की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है.
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पहले मोहबरा की तरफ से कुंड तक आने-जाने के लिए मुख्य रास्ता था, लेकिन धीरे-धीरे उस पर कब्जा कर आवागमन का मार्ग बंद कर दिया गया. आसपास की जमीनों की कथित बिक्री और निर्माण को लेकर भी प्रशासन से शिकायत की गई थी, जिसके बाद निर्माण कार्य रुकने की बात कही जा रही है. लोगों का कहना है कि समय रहते सीमांकन नहीं हुआ तो इस धरोहर का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.
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संत लाल करुण ने बताया कि मुख्यमंत्री को भेजे पत्र के बाद शिकायत जिलाधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार और लेखपाल तक पहुंची. लेखपाल की आख्या के बाद जिलाधिकारी की ओर से कुंड के उद्धार की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपे जाने का उल्लेख किया गया, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं दिखा.
मामला उजागर होने के बाद नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि कुंड की मौजूदा स्थिति की जांच कराई जाएगी. पहले यह स्पष्ट किया जाएगा कि कुंड किस विभाग के अधीन है और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है. यदि कुंड नगर निगम को हस्तांतरित है तो निगम स्वयं संरक्षण करेगा, अन्यथा पर्यटन विभाग से पत्राचार कर जीर्णोद्धार कराया जाएगा. उन्होंने प्राचीन स्वरूप बनाए रखते हुए सौंदर्यीकरण और बजट व्यवस्था का भी आश्वासन दिया.

