रविंद्र भारद्वाज, रायबरेली. जलसा रिसॉर्ट में आयोजित ‘बिगेस्ट डांडिया नाइट’ कार्यक्रम अब मनोरंजन से ज्यादा विवादों के कारण चर्चा में है. कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें मंच पर कथित तौर पर अश्लीलता भरे भोजपुरी गीतों पर डांस किया जाता दिखाई दे रहा है. वीडियो सामने आने के बाद धार्मिक आयोजन की गरिमा, आयोजकों की जिम्मेदारी और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

बताया जा रहा है कि नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में तेज आवाज में डीजे बजाया गया. इस दौरान ऐसे भोजपुरी गीत बजाए जा रहे थे, जिनके बोल धार्मिक आयोजन के अनुरूप नहीं थे. मंच पर मौजूद प्रतिभागियों ने इन गीतों पर डांस किया. इसे लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कुछ लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि कार्यक्रम का नाम डांडिया नाइट रखा गया था, तो उसमें पारंपरिक गरबा और डांडिया गीतों के बजाय कथित रूप से अश्लील भोजपुरी गानों को प्रमुखता क्यों दी गई.

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धार्मिक आयोजन या अश्लील मनोरंजन का मंच?

डांडिया और गरबा नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना, शक्ति उपासना और भारतीय लोक-संस्कृति से जुड़े पारंपरिक नृत्य हैं. इन आयोजनों में श्रद्धालु धार्मिक वातावरण में पारंपरिक गीतों और संगीत के साथ उत्सव मनाते हैं. ऐसे में डांडिया के मंच पर आपत्तिजनक गीतों और अश्लील अंदाज वाली प्रस्तुतियों के आरोपों ने आयोजन की मूल भावना पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के नाम पर केवल तेज संगीत, नृत्य और मनोरंजन को प्राथमिकता देना उचित नहीं है. आयोजकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कार्यक्रम में बजने वाले गीत, मंचीय प्रस्तुतियां और प्रतिभागियों की गतिविधियां धार्मिक भावनाओं, सामाजिक मर्यादा और भारतीय संस्कृति के अनुरूप हों.

आयोजकों की भूमिका पर भी सवाल

लोगों ने कार्यक्रम के आयोजकों से पूछा है कि मंच पर बजाए जा रहे गीतों और प्रस्तुतियों की निगरानी कौन कर रहा था. यदि कार्यक्रम धार्मिक पर्व के नाम पर आयोजित किया गया था, तो अश्लीलता वाले गीतों को रोका क्यों नहीं गया? वहीं, यदि यह केवल मनोरंजन कार्यक्रम था, तो इसे डांडिया और नवरात्रि से जोड़कर प्रचारित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

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डांडिया क्या है?

डांडिया गुजरात और राजस्थान की लोकप्रिय पारंपरिक लोकनृत्य शैली है, जिसे विशेष रूप से शारदीय नवरात्रि के दौरान खेला जाता है. इसमें पुरुष और महिलाएं हाथों में छोटी-छोटी रंगीन लकड़ियां लेकर संगीत की ताल पर एक-दूसरे के साथ लयबद्ध तरीके से नृत्य करते हैं.

डांडिया की लकड़ियों को कई लोग मां दुर्गा की शक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानते हैं. नवरात्रि में डांडिया और गरबा के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना की जाती है तथा श्रद्धालु भक्ति और उत्सव के वातावरण में शामिल होते हैं.

डांडिया और गरबा में अंतर

  • डांडिया: इसमें लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है और नृत्य मुख्य रूप से तालबद्ध टकराव के साथ किया जाता है.
  • गरबा: इसमें बिना लकड़ियों के गोल घेरे में घूमते हुए नृत्य किया जाता है. गरबा का संबंध मां दुर्गा की आराधना और दीप-ज्योति से माना जाता है.

आज डांडिया धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव का रूप भी ले चुका है. हालांकि, नवरात्रि से जुड़े आयोजनों में गीत-संगीत और प्रस्तुतियों के दौरान धार्मिक भावनाओं, भारतीय संस्कृति और सामाजिक मर्यादा का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है.