लखनऊ. उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा हासिल कर रहे छात्रों के लिए राहत की खबर है. राज्य के निजी इंजीनियरिंग और वोकेशनल कॉलेजों में शैक्षिक सत्र 2026-27 के दौरान फीस नहीं बढ़ाई जाएगी. छात्रों से पिछले सत्र 2025-26 में लागू फीस ही ली जाएगी. प्राविधिक शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. फैसले से डिग्री, डिप्लोमा और सहायता प्राप्त डिप्लोमा स्तर के इंजीनियरिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को फायदा मिलेगा.

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फीस नियमन समिति ने लिया फैसला

प्रवेश एवं फीस नियमन समिति की बैठक में छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए पुरानी फीस जारी रखने का निर्णय लिया गया. समिति ने वर्ष 2025-26 की मानक फीस को एक साल आगे बढ़ाकर 2026-27 में भी लागू करने की मंजूरी दी है. इससे निजी तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा.

अलग फीस वाले कॉलेजों को भी राहत

सरकार ने उन संस्थानों के लिए भी पुरानी फीस जारी रखने का फैसला किया है, जिनकी फीस मानक दर से अलग तय की गई थी. ऐसे कॉलेजों में भी इस शैक्षिक सत्र के दौरान पिछले सत्र की तरह ही फीस ली जाएगी. इससे फीस में संभावित बढ़ोतरी को लेकर छात्रों की चिंता कम होगी.

गरीब बच्चों की मुफ्त पढ़ाई के लिए 698 करोड़

दूसरी ओर, यूपी सरकार ने निजी स्कूलों में गरीब परिवारों के बच्चों की मुफ्त पढ़ाई के लिए 698 करोड़ रुपये जारी किए हैं. इससे 6.93 लाख बच्चों को लाभ मिलेगा. इसमें शैक्षिक सत्र 2025-26 के 5.36 लाख बच्चे और 2026-27 में नए प्रवेश लेने वाले 1.57 लाख बच्चे शामिल हैं.

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किताबों और स्टेशनरी के लिए भी मदद

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत पात्र बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति निजी स्कूलों को की जा रही है. इसके अलावा, किताबें और स्टेशनरी खरीदने के लिए प्रति बच्चे 5,000 रुपये की एकमुश्त सहायता अभिभावकों के आधार से जुड़े बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेजी जा रही है. फीस प्रतिपूर्ति और आर्थिक सहायता का उद्देश्य गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई जारी रखना है.